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Saturday, 7 November 2020

Rabindranath Tagore Biography in Hindi - रविन्द्रनाथ टैगोर की जीवनी

Rabindranath Tagore Biography in Hindi | रविन्द्रनाथ टैगोर की जीवनी

 

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore) कवि ,लेखक , दार्शनिक ,चित्रकार एवं प्रख्यात शिक्षाविद भी थे | उनका जन्म 7 मई 1861 को देवेन्द्रनाथ टैगोर एवं शारदा देवी के यहाँ हुआ | वे अल्पायु से ही कविताये रचने में लगे थे | मात्र 13 वर्ष की आयु में “तत्व बोधिनी” नामक पत्रिका में उनकी अभिलाषा नामक कविता प्रकाशित हुयी | कोलकाता के सेंट जेवियर स्कूल में शिक्षा पाने के बाद वे 1878 में अपने भाई सत्येन्द्रनाथ के साथ इंग्लैंड गये |

1880 में रविन्द्रनाथ (Rabindranath Tagore) अधूरी शिक्षा के साथ भारत लौट आये | 9 दिसम्बर 1883 को उनका विवाह मृणालिनी देवी से हुआ | 1884 में वे आदि ब्रह्म समाज के अध्यक्ष नियुक्त किये गये | वे अपने समय के विख्यात लेखको में से थे | 1891 में उन्होंने पोस्टमास्टर सहित छ लघुकथाये लिखी | राजशाही एसोसिएशन के आग्रह पर उन्होंने शिक्षा की पद्धति  की आलोचना “शिक्षेर हेर-फेर” लिखी | उन्होंने मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने पर बल दिया | इसी दौरान वे “साधना” के सम्पादक भी बने |

1901 में उन्होंने शांतिनिकेतन में विद्यालय की स्थापना की | उसी वर्ष उन्होंने “बंगदर्शन” का भार सम्भाला एवं अगले पाँच वर्ष तक उसका सम्पादन किया | उन्होंने “चोखेर बाली” एवं “नौका डूबी” जैसे उपन्यास भी लिखे | रविन्द्रनाथ (Rabindranath Tagore) गांधीजी के समर्थको में से थे | उन्होंने 1905 में हुए बंगाल विभाजन का विरोध किया | उस दिन उन्होंने बंगाल में परस्पर एकता की भावना विकसित करने के लिए रक्षाबंधन समारोह का आयोजन किया | 1912 में लन्दन की इंडियन सोसाइटी ने उनकी “गीतांजलि” प्रकाशित की |

अगले ही वर्ष मैकमिलन से गीतांजली , द क्रीसेट मून , द गार्डनर एवं चित्रा के अंग्रेजी संस्करण प्रकाशित हुए | 13 नबम्बर 1913 को उन्हें साहित्य के लिए नोबल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया | दो वर्ष बाद अंग्रेज सरकार ने उन्हें नाईटहुड की उपाधि दी | 1918 में उन्होंने विश्वप्रसिद्ध “विश्वभारती” की नींव रखी | एवं शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग किये | भारत की राजनीतिक दशा से वे अप्रसन्न थे | जलियांवाला बाग़ हत्याकांड के विरोध में उन्होंने “नाईटहुड” की उपाधि त्याग दी |

विश्वभारती के लिए चंदा एकत्र करने के लिए वे विश्व भ्रमण पर निकले | वे इंग्लैंड ,फ्रांस , स्विटजरलैंड , जर्मनी और USA गये | बाद के वर्षो में वे चित्र भी बनाने लगे | भारत तथा विश्व के अन्य देशो में उनकी कई चित्र प्रदर्शनिया आयोजित की गयी | 1940 में Oxford University ने उन्हें मानद उपाधि प्रदान की | 7 अगस्त 1941 को 80 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया |

Bhagwan Vishnu Biography In Hindi-भगवान् बिष्णु की जीवन कथा

भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की कई लीलाओं के बारे में आपने सुना ही होगा . लेकिन क्या आपने कभी श्रीकृष्ण के गुरु के बारे में सुना है. उनसे जुड़ी कहानियों को पढ़ा है अगर नहीं तो आइएये हम आप लोगो को , जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी वो बातें बतायेगे , जो हैरान करने वाली हैं और  जिनके बारे में आप नहीं जानते है |


1. कृष्ण के कुल 108 नाम हैं, जिनमें गोविंद, गोपाल, घनश्याम, गिरधारी, मोहन, बांके बिहारी, बनवारी, चक्रधर, देवकीनंदन, हरि, और कन्हैया ये नाम कुछ ज्यादा ही प्रमुख हैं |
2. श्री कृष्ण अपने गुरु संदिपनी को गुरु दक्ष‍िणा देने के लिए श्री कृष्ण ने उनके मृत बेटे को जीवित कर दिया था |
3. श्री कृष्ण की कुल 8 पटरानी और 16108 पत्न‍ियां थीं |
4. देवकी की सातवीं संतान बलराम थे ,आठवीं संतान कृष्ण थे , भगवान ने बाकी छह को भी देवकी से मिलवाया था |
5. श्री कृष्ण से भगवत गीता सबसे पहले अर्जुन ने नहीं, बल्क‍ि हनुमान और संजय ने सुनी थी. हनुमान कुरुक्षेत्र के युद्ध के दौरान अर्जुन के रथ में सबसे ऊपर सवार थे.
6. लोग ऐसा कहते है कि श्रीकृष्ण के मानव अवतार का अंत एक शिकारी के तीर से हुआ था |
7. शेषनाग के अवतार रोहिणी के पुत्र का नाम बलराम था ।

8. राधा बरसाना की रहने वाली थीं, ऐसा कहानियों में वर्णित है लेकिन नंदगोपाल की यह सखि उनकी हमजोली नहीं बल्कि उम्र में उनसे बड़ी थीं, ऐसा बरसाना वाले कहते हैं।

9. श्री कृष्ण के धनुष का नाम शारंग और अस्त्र का नाम सुदर्शन चक्र था।

10. भगवान श्री कृष्ण की गदा का नाम कौमोदकी और शंख को पांचजन्य कहते थे।

11. बलराम का जन्म अष्टमी के दो दिन पहले अर्थात छठ के दिन मनाया जाता है, जिसे कि 'ललई छठ' के रूप में देश में मनाया जाता है।

Thursday, 26 July 2018

Anushka Sharma Life Biography In Hindi - अभिनेत्री बनी अनुष्का शर्मा की जीवनी

 Anushka Sharma Life Biography In Hindi - अभिनेत्री बनी अनुष्का शर्मा की जीवनी



 Anushka Sharma Life 

अनुष्का शर्मा भारत की एक मॉडल और बॉलीवुड की प्रमुख अभिनेत्री हैं. अनुष्का शर्मा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत आदित्य चोपड़ा की फिल्म ” रब ने बना दी जोड़ी ” से 2008 में की. अनुष्का शर्मा को फिल्मफेयर अवार्ड भी मिल चुके हैं. मशहूर अभिनेत्री होने के साथ-साथ शर्मा एक फिल्म प्रोडूसर भी हैं. फिल्मों के साथ-साथ Anushka Sharma बहुत से ब्रांडो की ब्रांड एम्बेसडर भी हैं.
शर्मा एक सामाजिक कार्यकर्ता भी रह चुकी हैं. अनुष्का ने समाज में लिंग भेदभाव और जानवरों का शोषण के विरोध में बहुत से सामाजिक कार्य भी किये हैं.

 Anushka Sharma Biography 

पूरा नाम – अनुष्का शर्मा
जन्म – 1 मई 1988, अयोध्या, उत्तर प्रदेश भारत
शिक्षा – कला में स्नातक
पिता – अजय कुमार शर्मा, भारतीय सेना में एक ऑफिसर
माता – आशिमा शर्मा, हाउस वाइफ
भाई – कारनेश शर्मा, पूर्व स्टेट लेवल खिलाडी और वर्तमान में मर्चंट नेवी में कार्यरत
पति -विराट कोहली
पेशा – निर्माता और बॉलीवुड की हीरोईन और मॉडल लम्बाई – 5 फीट 8 इंच
पैतृक गाँव – गड़वाल, उत्तराखंड, भारत
हिंदी सिनेमा में पहली फिल्म – रब ने बना दी जोड़ी

Anushka Sharma early life 

अनुष्का शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के अयोध्या में 1 मई 1988 को हुआ था. इनके माता-पिता मूलरूप (Radical) से उत्तराखंडके रहने वाले हैं. शर्मा के पिता इंडियन आर्मी में कर्नल हैं और माता एक गृहिणी हैं. शर्मा का एक भाई कारनेश शर्मा जो इंडियन मर्चंट नेवी में कार्यरत हैं. अनुष्का ही पढाई और शिक्षा आर्मी स्कूल से हुई. शर्मा की पढाई बंगलौर के कारमेल कॉलेज से हुई. जहाँ से अनुष्का शर्मा ने कला में स्नातक किया हैं. उसके बाद अनुष्का शर्मा ने मुंबई का रुख किया. शर्मा ने अपने कैरियर की शुरुआत एक मॉडल के तौर पर की.

Anushka Sharma career and fame

अनुष्का शर्मा का पहले फिल्मों की तरफ कम रूझान था, वह मॉडलिंग (Modeling)  में एक अलग मुकाम हासिल करना चाहती थीं. अनुष्का ने अपने मॉडलिंग (Modeling) कैरियर की शुरुआत लक्मे फैशन वीक के लेस वंप्स शो की मॉडल के तौर पर किया. कलेक्शन के टॉप – 7 में उनको जगह मिल गई और चयन हो गया. आगे जाकर अनुष्का ने नाथेला ज्वेलरी और फियाट पालियो के प्रचार-प्रसार में काम किया.
धीरे-धीरे अनुष्का एक खास मॉडल उभरकर सामने आयी. उसके बाद शर्मा को 2008 में निर्देशक आदित्य चोपड़ा की फिल्म रब ने बना दी जोड़ी में सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ काम करने का मौका मिला. यह फिल्म हिट साबित हुई और फिल्म को मार्केट में अच्छा "Response" मिला.
इसके बाद शर्मा का फिल्मी सफर आगे बढ़ा और फिल्म बदमाश कंपनी जो डायरेक्टर यश राज के बैनर तले बनी थीं इसमें काम करने को मिला. जो 2010 में रिलीज हुई थी आगे चलकर शर्मा ने बैंड बाजा बारात में अभिनेता रणवीर सिंह के साथ कार्य किया ये वो समय था जब अनुष्का शर्मा ने फिल्म इंडस्ट्री में पैर रखा था. इन फिल्मों से अनुष्का को काफी नाम और पहचान मिली.

Anushka Sharma leading films

रब ने बना दी जोड़ी, बदमाश कंपनी, बैंड बाजा बारात, पटियाला हाउस, लेडिज एंड रिकी बहल, जब तक हैं जान, मटरू की बिजली का मंडोला, पीके, ऐ दिल हैं मुश्किल और सुल्तान.

Hrithik Roshan Biography In Hindi - लोकप्रिय अभिनेता हृतिक रोशन की कहानी

Hrithik Roshan Biography In Hindi - लोकप्रिय अभिनेता हृतिक रोशन की कहानी 



Hrithik Roshan Life


हृतिक रोशन सबसे लोकप्रिय भारतीय अभिनेता और मशहूर हस्तियों में से एक है और फिल्मकार राकेश रोशन के बेटे, उन्होंने कई पात्रों को चित्रित किया है और उनकी नृत्य क्षमता के लिए जाना जाता है।

वह भारत के सर्वोच्च-भुगतान करने वाले कलाकारों में से एक हैं और उन्होंने कई फिल्म पुरस्कारों सहित छे फिल्मफेयर पुरस्कार जीते हैं।


रितिक रोशन का जन्म 10 जनवरी 1974 को प्रमुख मुंबई के एक पंजाबी परिवार हुआ था। जिसे हम बॉलीवुड परिवार भी कह सकते हैं मतलब उनके पिता, फिल्म निर्देशक राकेश रोशन, संगीत निर्देशक रोशनलाल नागराथ के पुत्र हैं; उनकी मां, पिंकी, निर्माता और निर्देशक जे ओम प्रकाश की बेटी हैं।

उनके चाचा, राजेश, एक संगीत संगीतकार हैं। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से हुयी। हृतिक रोशन पंजाबी जरुर हैं लेकीन वो हिंदुत्व की प्रथा को मानते हैं।

हृतिक रोशन कहते हैं कि,
“मैं धार्मिक नहीं हूं। मैं मंदिरों की यात्रा नहीं करता हूं लेकिन मुझे आशा है कि एक महाशक्ति है।”


रितिक रोशन को एक अलग बच्चे के रूप में महसूस होता था; क्योंकी उनका जन्म उनके दाहिने हाथ पर एक अतिरिक्त अंगूठे के साथ हुआ था।

रितिक ने फैसला किया कि वह एक पूर्णकालिक अभिनेता बनना चाहते थे, लेकिन उनके पिता ने जोर देकर कहा कि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करे।

रोशन ने सिडनहैम कॉलेज में भाग लिया, जहां उन्होंने पढ़ाई करते हुए नृत्य और संगीत समारोहों में हिस्सा लिया, वाणिज्य में स्नातक किया।

रोशन ने अपने पिता की चार फिल्मों – खुड्गरज़ (1987), किंग चाचा (1993), करन अर्जुन (1995) और कोयला (1997) में सहायता की।

पैक-अप के बाद, रितिक कोयला से शाहरुख खान के दृश्यों को देखकर उनके जैसा बनाना चाहा और एक अभिनेता के रूप में अपने प्रदर्शन के बारे में निर्णय लेने के लिए खुद को तैयार किया।

जब उन्होंने अपने पिता की मदद की, तब उन्होंने किशोर निति कपूर के अधीन अभिनय का अध्ययन किया।


Hrithik Roshan Career



रितिक ने अक्सर अपने पिता को सहयोग किया है उन्होंने 1980 के दशक में कई फिल्मों में एक बाल अभिनेता के रूप में संक्षिप्त प्रदर्शन किए, और बाद में अपने पिता की चार फिल्मों पर सहायक निर्देशक के रूप में काम किया।

उनकी पहली प्रमुख भूमिका वाली और बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाने वाली फ़िल्म कहो ना … प्यार है (2000) थी, जिसके लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले।

2000 आतंकवाद नाटक फिजा में प्रदर्शन और 2001 में फॅमिली फ़िल्म की कभी खुशी कभी गम… उनकी प्रतिष्ठा को बढाती गई लेकिन इसके बाद उन्हें कई खराब फिल्में मिलीं।

2003 की विज्ञान कथा फिल्म “कोई … मिल गया”, जिसके लिए रोशन ने दो फिल्मफेयर अवॉर्ड्स को जीता। यह उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ था; वह अपनी अत्यधिक सफल सीक्वेल में भी दिखाई दिए: क्रिश (2006) और क्रिश 3 (2013)।

उन्हें 2006 के साहसिक फिल्म “धूम 2” में चोर के चित्रण के लिए, ऐश्वर्या राय के साथ 2008 की ऐतिहासिक “मुगल सम्राट अकबर” के रोमांस में जोधा अकबर और 2010 में फ़िल्म गुजारिश के लिए काफी प्रशंसा मिली।

आगे की सफलता 2011 में कटरीना कैफ के साथ फ़िल्म “जिंदगी ना मिलेगी दोबारा”, 2012 में प्रियंका चोपड़ा के साथ आयी फिल्म “अग्निपथ” और 2014 के एक्शन कॉमेडी बैंग बैंग के साथ हुई थी।

Hrithik Roshan Presonal Life 



20 दिसंबर 2000 को, रोशन ने बंगलुरू में एक निजी समारोह में सुझान खान से शादी की। उनके धार्मिक अंतर के बावजूद- रोशन एक हिंदू है और खान एक मुसलमान है – रोशन का कहना है कि उन्होंने अपने विश्वासों की समानता की समानता की। इस दंपति के दो बेटे हैं, हरेहन और हरिहान।

हृतिक रोशन दिसंबर 2013 में अलग हो गए और नवंबर 2014 में उनके तलाक को अंतिम रूप दिया गया।

रितिक ने टीवी मंच पर बस नृत्य प्रदर्शन किया के साथ शुरुआत की थी। बाद के जज के तौर पर, और अब वह भारतीय टेलीविजन पर उच्चतम-भुगतान वाला फिल्म स्टार बन गये। और आज सब के दिलो पर राज कर रहे हैं।



Tuesday, 24 July 2018

Anil Kapoor Biography In Hindi - अनिल कपूर की जीवनी

Anil Kapoor Biography In Hindi - अनिल कपूर की जीवनी 


Anil Kapoor Life 


अनिल कपूर भारतीय फिल्‍म अभिनेता और निर्माता हैं जो कि बाॅलीवुड और हॉलीवुड फिल्‍मों में अपने अभिनय और डॉयलाग बोलने के अंदाज से भी जाने जाते हैंा वे मुख्‍यत: हिन्‍दी फिल्‍मों में ही काम करते हैां वे हर शैली की फिल्‍मों में काम कर चुके हैं और उन्‍हें काफी सराहना भी मिली हैा

Anil Kapoor Background


अनिल कपूर का जन्‍म चेंबूर, मुंबई में हुआ थाा उनके पिता का नाम सुरिंदर कपूर और मां का नाम निर्मला कपूर हैा उनके दो भाई भी हैं- बड़े भाई का नाम बोनी कपूर और छोटे भाई का नाम संजय कपूर हैा

Anil Kapoor studies

उन्‍होंने ऑवर लेडी ऑफ परपिच्‍युल सकर हाईस्‍कूल, चेंबूर से पढ़ाई की थीा इसके बाद उन्‍होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई से पढ़ाई कीा

Anil Kapoor wedding

अनिल की शादी सुनीता कपूर से हुई है जिनसे उन्‍हें तीन बच्‍चे हैं- दो लड़कियां: सोनम कपूर और रिया कपूर और एक लड़का: हर्षवर्धना

Anil Kapoor Career

कपूर के फिल्‍मी करियर की शुरूआत फिल्‍म 'हमारे तुम्‍हारे' से एक छोटे के किरदार से हुई थी लेकिन फिल्‍म 'वो सात दिन' में उनकी पहली अग्रणी भूमिका थीा इसके बाद उन्‍होंने कई फिल्‍मों में छोटी-बड़ी भूमिकाएं निभाईं और आलोचकों के साथ साथ दर्शकों का काफी मनोरंजन कियाा

Anil Kapoor Famous Films

मेरी जंग, चमेली की शादी, जांबाज, कर्मा, मि.इंडिया, तेजाब, रामलखन, घर हो तो ऐसा, बेटा, 1942 ए लव स्‍टोरी, विरासत, हम आपके दिल में रहते हैं, ताल, बुलंदी, पुकार, नायक, वेलकम, रेस, स्‍लमडॉग मिलेनियर जैसी फिल्‍मों में उन्‍होंने अपने अभिनय का जलवा बिखेराा फिल्म बेटा में निभाए गए उनके किरदार ने सभी को भावनात्‍मक कर दिया था और ऐसा कहा जाने लगा था कि बेटा हो तो ऐसाा व‍हीं फिल्‍म 'नायक' में निभाए गए उनके 1 दिन के मुख्‍यमंत्री के किरदार को खूब प्रशंसा मिली |

Anil Kapoor Facts In Hindi 


1. अनिल का जन्म एक पंजाबी परिवार के फिल्म निर्माता के घर हुआ। जो पाकिस्तान से भारत के पेशावर जिले में चला गये।
2. जब वह पहली बार मुंबई आया तो उनका परिवार राज कपूर के गैरेज में रहता था और बाद में वह मुंबई के चॉल क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए।
3. 13 साल की उम्र तक उन्होंने कभी जूते नहीं डाले और वह नंगे पैर चला करते थें।
4. उनके पिता प्रसिद्ध फिल्म निर्माता थे , जिन्होंने शरुआत में मशहूर फिल्म अभिनेता शम्मी कपूरके साथ सहायक निर्देशक के तौर पर कार्य किया था।
5. वह पुणे फिल्म इंस्टिट्यूट की लिखित परीक्षा में विफल रहे।   अनिल कपूर
6. उन्होंने अपनी पहली बॉलिवुड फिल्म “हमारे तुम्हारे” (1979) में एक सहायक भूमिका के तौर पर अभिनय किया, उनके अभिनय से खुश हो कर यश चोपड़ा ने उन्हें “मशाल” (1984) फिल्म में मुख्य अभिनेता की भूमिका प्रदान की।
7. 1985 में फिल्म “मेरी जंग” द्वारा उनके जीवन में एक मोड़ा आया। जब जावेद अख्तर ने पहली बार उनकी प्रतिभा को देखा और रमेश सिप्पी को उन्हें फिल्म “शतरंज” के लिए अनुशंसित किया, जहां अनिल को जावेद जाफरी की भूमिका को निभाना था। बाद में फिल्म का नाम बदलकर “मेरी जंग” रख दिया गया । जिसमें अनिल को अमिताभ बच्चन के स्थान पर अभिनय करना था।
8. उन्होंने फिल्म “चमेली की शादी” 1986 के लिए एक गीत गाया था।
9. वर्ष 1987 में आई फिल्म “मिस्टर इण्डिया” के लिए पहली पसंद अमिताभ बच्चन थे, लेकिन बाद में यह भूमिका अनिल को मिल गई।
10. उनकी सुपर हिट फिल्म “तेजाब” 1988 एक राजनीतिक नाटक फिल्म थी। जिसमें आमिर खान और नाना पाटेकर की मुख्य भूमिका थी, लेकिन बाद में फिल्म के निर्देशक एन चंद्रा ने फिल्म को स्थगित कर दिया और अनिल कपूर के साथ एक नई फिल्म बनाई।
11. वर्ष 1989 में आई फिल्म “चाँदनी” के लिए सबसे पहले अनिल को चुना गया था, लेकिन बाद में ऋषि कपूर को उनकी जगह ले लिया गया।
12. यद्यपि वह अपनी मूंछों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कुछ फिल्मों के लिए उन्होंने अपनी अपनी मूंछ कटवा ली थी जैसे कि लम्हे (1991), झूठ बोले कौवा काटे (1998), और सलाम-ए-इश्क (2007) ।  अनिल कपूर फिल्म लम्हे में बिना मूंछों के साथ
13. उन्होंने “पुकार” (2001) और “गांधी माय फादर” (2008) के लिए दो बार प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता है।
14. वह “झकास” शब्द के लिए काफी जाने जाते है।
15. वह अपने स्वास्थ्य शरीर के पीछे वह अपनी सकारात्मक सोच को बताते है।
16. सिनेमा में उनके योगदान के लिए, सिंगापुर स्थित मैडम तुसाद में एक मोम की प्रतिमा स्थापित करके अनिल कपूर को सम्मानित किया गया।  मैडम तुसाद में अनिल कपूर मोम की प्रतिमा
17. वह एक मांसाहारी हैं, लेकिन उनकी पत्नी शाकाहारी है।
18. उनकी पत्नी एक आभूषण डिजाइनर हैं और उनका एक हेल्थ क्लब का व्यवसाय भी हैं।
19. वह पहले धूम्रपान करते थे, लेकिन उनकी बेटी सोनम कपूर के बॉलीवुड में प्रवेश करने के बाद, उन्होंने धूम्रपान करना छोड़ दिया क्योंकि उन्होंने सोनम से वादा किया था, कि जिस दिन वह अपने अभिनय करियर को शुरू करे गयी उस दिन वो धूम्रपान करना छोड़ देंगे।

Aamir Khan Biography In Hindi - आमिर खान खान की जीवनी

Aamir Khan Biography In Hindi - आमिर खान खान की जीवनी


पूरा नाम   –  मुहम्मद आमिर हुसैन खान
जन्म        –  14 मार्च 1965
जन्मस्थान  –  मुंबई. महाराष्ट्र
पिता        –  ताहिर हुसैन
माता       –  जीनत हुसैन


Aamir Khan एक भारतीय फिल्म अभिनेता, निर्देशक, निर्माता, टेलीविज़न हस्ती, सामाजिक कार्यकर्त्ता, चलचित्र लेखक और मानव प्रेमी है. फिल्म जगत में अपने सफल करियर के बल पर उन्होंने खुद को हिंदी फिल्म जगत का सबसे मशहूर कलाकार बनाया. उनके करियर में उन्हें कई सारे पुरस्कारों से नवाज़ा गया है, जिसमे चार राष्ट्रिय फिल्म पुरस्कार और सात फिल्मफेयर अवार्ड भी शामिल है. भारत सरकार की तरफ से उन्हें 2003 में पद्मश्री और 2010 में उन्हें पद्म भूषण से भी नवाज़ा गया था.

खान का जन्म ताहिर हुसैन (फिल्म निर्माता) और जीनत हुसैन के बड़े बेटे के रूप में मुंबई में 14 मार्च 1965 को हुआ था. खान के बहोत से रिश्तेदार फिल्म जगत के सदस्य थे. जिनमे उनके अंकल नासिर हुसैन का भी समावेश था. कहा जाता है की अपनी दादी की वजह से वे दर्शनशास्त्री अबुल कलाम आजाद के भी रिश्ते में आते थे. खान अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़े है, उनके एक भाई है, फैसल खान और दो बहने, फरहत और निखत खान. उनका भतीजा, इमरान खान एक आधुनिक हिंदी फिल्म अभिनेता है.

आमिर खान बच्चपन में ही दो भूमिका में परदे पर आये थे. 8 साल की आयु में, नासिर हुसैन के निर्देशन वाली म्यूजिकल फिल्म यादो की बारात (1973) में उन्होंने अभिनय किया था. उसी साल उन्होंने अपने पिता द्वारा निर्मित मदहोश में भुमिका अदा की थी. खान ने बाद में प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए जे.बी. पेटिट स्कूल जाना शुरू किया और बाद में 8वी कक्षा तक बांद्रा की सेंट एंस स्कूल से उन्होंने शिक्षा ग्रहण की. और महिम की बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से 9वी और 10वी की शिक्षा ग्रहण की. खान को बचपन से ही टेनिस में बहोत रूचि थे, उन्हें टेनिस खेलना बहोत पसंद था. उनके शिक्षको का हमेशा से ही यह कहना था की, खान का ध्यान पढाई में कम और खेलने में ज्यादा है. मुंबई के नरसी मोंजी कॉलेज से उनकी 12 वी की शिक्षा प्राप्त की. खान ने अपने बचपन को आर्थिक परेशानिया होने की वजह से बहोत ‘कठिन’ बताया. उस समय उनके पिता को आर्थिक मंदी से होकर गुजरना पड़ रहा था, खान ने बताया की उनके पिता ने जिन-जिन से भी उधार ले रखा था उनके तक़रीबन दिन में 20-30 फ़ोन आते रहते थे. और खान को हमेशा से ही यह डर लगा रहता था की कही फीस ना देने की वजह से स्कूल से निकाला न जाये.

16 साल की आयु में, Aamir Khan ने एक प्रयोग किया और 40 मिनट की एक साइलेंट फिल्म (मूक फिल्म) बनाई. जिसे परानोईया का नाम दिया गया, यह फिल्म उनके स्कूल के दोस्त आदित्य भट्टाचार्य के निर्देशन में ही बनाई गयी थी. इस फिल्म को बनाने में श्रीराम लागू ने धन देकर उनकी सहायता की. जो भट्टाचार्य को अच्छी तरह से जानते थे लागू ने उन्हें हजारो रुपयों की सहायता की. खान के माता-पिता उस समय अपने अनुभव के आधार पर खान द्वारा लिए गये इस निर्णय के विरोध में थे. वे चाहते थे की फिल्मजगत में आने की बजाये उनका बेटा कोई डॉक्टर या इंजिनियर बने. और अंततः फिल्म की शूटिंग पूरी हो ही गयी. फिल्म में आमिर खान अपने सह-अभिनेता नीना गुप्ता और विक्टर बनर्जी के साथ मुख्य भूमिका में थे. उस समय भट्टाचार्य ने कहा था की उस फिल्म ने उसके करियर को एक नयी दिशा प्रदान की थी, और नया अनुभव उन्हें उस फिल्म से प्राप्त हुआ था.

खान बाद में अवांतर नाम के एक थिएटर समूह में शामिल हो गये थे, जहा एक साल तक वे परदे के पीछे की भुमिका निभाते रहे. उन्होंने अपने अभिनय की शुरुवात कंपनी के ही एक गुजराती नाटक, केसर बिना में छोटी सी भुमिका अदा कर के की. बाद में उन्होंने दो हिंदी नाटक और एक अंग्रेजी नाटक में अभिनय किया. और अपनी हाई-स्कूल की पढाई पूरी करने के बाद उन्होंने पढाई छोड़ने का निर्णय लिया, और अपने माता-पिता के निर्णय के विरुद्ध जाकर वे निर्देशक नासिर हुसैन के सहायक बने. जिन्होंने उस समय मंजिल-मंजिल (1984) और ज़बरदस्त (1985) का निर्माण किया था.


Aamir Khan Career


आमिर खान  सबसे पहले एक बाल कलाकार के रूप में फिल्म जगत में आये. और बाद में उनका पहला फिल्म अभिनय 1984 की होली फिल्म शुरू हुआ था. उन्हें अपने भाई मंसूर खान के साथ फिल्म क़यामत से क़यामत तक (1988) के लिए अपनी पहली कमर्शियल सफलता मिली और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ट मेल नवोदित पुरस्कार भी दिया गया. उस समय उनकी एक और थ्रिलर फिल्म राख (1989) ने कई पुरस्कार अपने नाम किये. 1990 के दौर में एक से बढ़कर एक सफल फिल्मे देकर उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपना नाम स्वर्णक्षरो से लिख दिया था. उस समय उनकी सबसे सफल फिल्मो में रोमांटिक ड्रामा दिल (1990), रोमांटिक राजा हिन्दुस्तानी (1996), इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर की तरफ से बेस्ट एक्टर का पुरस्कार भी मिला, और ड्रामा फिल्म सरफरोश (1999) भी शामिल है. हिंदी फिल्मो के अलावा उन्होंने एक कैनेडियन-भारतीय फिल्म अर्थ (Earth) (1998) में भी अभिनय किया है.

2001 में,  Aamir Khan ने एक प्रोडक्शन कंपनी की स्थापना की. और अपने प्रोडक्शन में पहली फिल्म ‘लगान’ रिलीज़ की. यह फिल्म आलोचकों और कमर्शियल लोगो की नज़र से सफल रही और साथ ही इसे सर्वश्रेष्ट विदेशी भाषा फिल्म (Best Foreign Language Film) के लिए 74 वे अकादमी पुरस्कार में भारत की अधिकारिक सुची में चुन लिया गया. इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी मिला और ‘लगान’ को साल की सर्वश्रेष्ट फिल्म का दर्जा दिया गया. इसके बाद फिल्म से 4 सालो तक दूर रहने के बाद खान ने प्रेरणादायक भूमिका अदा करना शुरू की और 2005 में केतन मेहता की मंगल पांडे में वे एक सिपाही के रूप में दिखे. और 4 साल के आराम के बाद 2006 में उन्होंने दो सुपरहिट फिल्म फना और रंग दे बसंती रिलीज़ की. उसी साल उन्होंने अपने करियर की शुरुवात एक निर्माता के रूप में भी की और 2007 में तारे जमीन पर का निर्माण किया. जिसे दर्शको की अच्छी प्रतिक्रिया मिली. और इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ट निर्देशक (Best Director) का भी पुरस्कार मिला. कमर्शियली खान की सबसे सफल फिल्मो में गजनी (2008), 3-इडियट्स (2009), धुम-3 (2013), पीके (2014) शामिल है, जिनके रिलीज़ होते ही बॉलीवुड के कई रिकार्ड्स धराशाही हो गये थे.

Aamir Khan Early Life


Aamir Khan का विवाह रीना दत्ता से हुआ, जिसने क़यामत से क़यामत तक में छोटी सी भुमिका निभाई थी. उनका विवाह 18 अप्रैल 1986 को हुआ था. उन्हें दो बच्चे थे, एक बेटा. जुनैद और एक बेटी इरा. रीना ने आमिर के करियर को सफल बनाने में उनकी बहोत सहायता की थी. लेकिन फिर भी दिसम्बर 2002 में खान ने उन्हें तलाक दे दिया था, और इस तरह 15 साल की शादी में टूट गयी. रीना को ही उनके दोनों बेटे की देखभाल करने के लिए दिया गया था. 28 दिसम्बर 2005 को, खान का दूसरा विवाह किरन राव से हुआ, जो लगान फिल्म बनाते समय आशुतोष गोवारिकर की सह-निर्देशक थी. 5 दिसम्बर 2011 को उन्हें एक बेटा, जिसका नाम हे आजाद राव खान.

आज देश का बच्चा-बच्चा आमिर खान को चाहता है. उनके अनुयायी हमें भारत में ही नही बल्कि विदेशो में भी मिलते है. वे हमेशा से ही सामाजिक गतिविधियों में सक्रीय रूप से हिस्सा लेते रहे है. एक सफल कलाकार होने के साथ ही खान एक मानव प्रेमी भी है, बाद में उन्होंने समाज में हो रही गतिविधियों पर बोलना भी शुरू किया. वे कई राजनितिक गतिविधियों में हिस्सा लेने लगे और समाज सेवा करने लगे. समाज में हो रही समस्याओ को जानने के लिए उन्होंने एक टेलीविज़न शो ‘सत्यमेव जयते’ का निर्माण किया, जिसमे उन्होंने भारत में तेज़ी से बढ़ रही समस्याओ को दिखाया और साथ ही उसे रोकने की भी कोशिश की.

Aamir Khan हमेशा से लोगो को यह सलाह देते आये है की, “आप तब महान नही बनते जब आप बड़ी-बड़ी बाते करने लगते हो, जबकि आप महान तब बनते हो जब आप छोटी-छोटी बातो को समझने लगते हो.”


Aamir Khan Dialogues


जिंदगी जीने के दो ही तरीके होते है…एक जो हो रहा है होने दो, बरदाश्त करते रहो … या फिर जिम्मेदारी उठाओ उसे बदलने की. ( Movies : रंग दे बसंती )
लाढ़ोंगे तो खून बहेगा… और नहीं लाढ़ोंगे तो ये लोग खून चूस लेगे. ( फिल्म : गुलाम)
दावा भी काम ना आये, कोई दुआ ना लगे… मेरे खुदा किसी को प्यार की हवा ना लगे. ( Film : सरफ़रोश )
बच्चो काबिल बनो, काबिल… कमियाबी तो साली झक मार के पीछे भागेंगी…. ( Movie : 3 इडियट्स)

Amir khan facts in hindi 


1. आमिर फिल्म उद्योग की पृष्ठभूमि से हैं, क्योंकि उनके पिता और चाचा एक फिल्म निर्माता थे।
2. उनके चाचा अब्दुल कलाम आज़ाद एक लोकप्रिय भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे, क्योंकि उन्होंने खिलाफत आंदोलन का नेतृत्व किया था और महात्मा गांधी के प्रबल समर्थक थे। जिसके चलते उन्होंने अपने बेटे का नाम आज़ाद राव खान रखा।
3. उनके पिता द्वारा निर्मित अधिकांश फ़िल्में फ्लॉप होती थीं, जिसका मुख्य कारण वित्तीय संकट था। उस समय उन्होंने कहा कि “उन्हें दिन में 30 से अधिक फोन आते थे उधारदाताओं के और मुझे यह भी डर लगा रहता था कि अगर बच्चों की स्कूल फ़ीस का समय पर भुगतान नहीं किया गया तो उन्हें स्कूल से निकाल दिया जाएगा।”
4. वह बचपन में गुब्बारे और पतंग के बहुत दीवाने थे।
5. 8 वर्ष की उम्र में उन्होंने फिल्म ‘यादों की बारात’ में एक बाल अभिनेता के रूप में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की, जो पहली बॉलीवुड मसाला फिल्म थी। आमिर खान फिल्म - यादों की बारात में
6. आमिर बचपन से ही लॉन टेनिस खेलना पसंद करते थे, जिसके चलते उन्होंने कई बार राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व भी किया। वह महाराष्ट्र राज्य स्तरीय टेनिस के विजेता भी थे।
7. 16 साल की उम्र में, उन्होंने अपने दोस्त आदित्य भट्टाचार्य (फिल्म निर्माता बसु भट्टाचार्य के बेटे) के साथ एक सहायक निर्देशक के रूप में कार्य किया।
8. अपनी फिल्म “कयामत से कयामत तक” के प्रचार के दौरान, आमिर अपने चचेरे भाई और सह-कलाकार राज ज़ुत्शी के साथ मुंबई की बसों और ऑटो रिक्शा में फिल्म के पोस्टर लगाने के लिए जाते थे। फिल्म "कयामत से कयामत तक" का पोस्टर
9. वर्ष 1990 में, उन्हें इंद्रकुमार की फिल्म “दिल” में लिया गया, जो आमिर की लगातार चार फ्लॉप फिल्मों के बाद एक सुपर हिट फिल्म साबित हुई। आमिर खान फिल्म दिल में
10. फिल्म गुलाम की शूटिंग के दौरान आमिर ने एक स्टंट किया, जिसमें आमिर तेज रफ़्तार ट्रेन के सामने रेल पटरी पर भागते हुए 1.3 सेकंड में रेल पटरी से कूद जाते हैं। जिसके चलते उन्हें सर्वश्रेष्ठ दृश्य के लिए 44 वें फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन, उन्होंने पुरस्कार स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। आमिर खान फिल्म गुलाम में
11. वर्ष 1996 में, वह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म “राजा हिंदुस्तानी” के साथ आए, जिसे श्रोताओं ने काफी सराहा। फिल्म में करिश्मा के साथ चुंबन दृश्य एक बॉलीवुड फिल्म में सबसे लंबे समय तक चुंबन के रूप में माना जाता है। आमिर खान फिल्म राजा हिंदुस्तानी में
12. उन्हें कभी पीने की आदत नहीं थी, लेकिन एक गीत “तेरे इश्क में नाचेंगे” की शूटिंग से पहले उन्होंने एक लीटर वोदका शराब का सेवन किया, जिससे वह अपने शराबी चरित्र को अधिक कुशलता से निभा सकें। आमिर खान गीत तेरे इश्क में नाचेंगे
13. अपनी फिल्म “लगान” में भुवन के चरित्र के लिए उन्होंने अपने कानों को छिदवाया, ताकि वह वास्तविक में बालियां पहन सकें। इसके अलावा, उनके अभूतपूर्व प्रदर्शन से फिल्म ऑस्कर पुरस्कार के लिए नामांकित हुई। आमिर खान फिल्म लगान में
14. जब फ़राह खान ने आमिर खान से “ओम शांति ओम” के एक गीत में विशेष रूप से उपस्थित होने के लिए संपर्क किया, तो उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह शूटिंग में व्यस्त हैं और इसके लिए उनके पास अभी समय नहीं है।
15. ब्लॉकबस्टर हिट फिल्म – पीके में उनको पान का शौकीन दिखाया गया है, जिसके चलते वह पूरी फिल्म के फिल्मांकन के दौरान 100 पान प्रतिदिन खाते थे। आमिर खान फिल्म - पीके में पान खाते हुए
16. आमिर खान फिल्म डर, स्वदेश, साजन और हम आपके हैं कौन में मुख्य भूमिका के लिए पहली पसंद थे, जिसके बाद उन फिल्मों में क्रमश: शाहरुख़ खान, संजय दत्त और सलमान खान ने अभिनय किया। वह फ़िल्में बॉलीवुड में सुपरहिट साबित हुईं।
17. अपने काम के प्रति समर्पण आमिर का फिल्म उद्योग में प्रसिद्ध है, एक बार उन्हें मैडम तुसाद संग्रहालय में मोम पुतलों के अनुकरण के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने उसमें भाग लेने से मना कर दिया, क्योंकि उस समय वह अपनी फिल्म “तारे जमीन पर” की शूटिंग में व्यस्त थे।
18. आमिर दिखावटीपन में विश्वास नहीं करते हैं और अपने जन्मदिन समारोह में एकरूपता बनाए रखते हैं। हर साल वह अपने केक को काटते हैं और उसके बाद अपने परिवार के साथ डिनर का आनंद उठाते हैं। इसके अलावा, वह हर साल अपने जन्मदिन पर धूम्रपान छोड़ने के लिए संकल्प लेते हैं, लेकिन वह अपने संकल्प को तोड़ देते हैं। आमिर खान अपने 52वें जन्मदिवस के समय
19. आमिर को राज कुमार हिरानी की फिल्म 3 इडियट्स में शर्मन जोशी वाली भूमिका की पेशकश की गई थी। हालांकि, उन्होंने रेंचो की भूमिका में अपनी रूचि दिखाई और उनकी रेंचो की भूमिका काफी लोकप्रिय हुई।
20. आमिर खान ने फिल्म 3 इडियट्स में एक नशे के दृश्य को फिल्माने के लिए वास्तव में शराब पी, जिसके कारण फिल्म में इस दृश्य को करने के लिए कैमरामैन ने कई रिटेक लिए। यहां उस दृश्य की एक झलक है :
21. एक साक्षात्कार में, आमिर ने खुलासा किया कि वह अभिजात जोशी की 3 इडियट्स की रीमेक पर कार्य कर रहे हैं, जो वर्ष 2020 में सिनेमाघरों में दिखाई जाएगी।
22. वर्ष 2012 में, वह एक भारतीय टेलीविजन टॉक शो- सत्यमेव जयते के साथ टीवी पर आए, जिसका प्रसारण स्टार प्लस, स्टार वर्ल्ड और दूरदर्शन पर किया जाता था, इस कार्यक्रम ने आठ भाषाओं में तीन सत्र पूरे किए थे।
23. वर्ष 2013 में, उन्हें टाइम पत्रिका की “विश्व के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों” की सूची में शामिल किया गया। आमिर खान टाइम पत्रिका में
24. उनकी पत्नी किरण राव को “कॉफ़ी विद करण” कार्यक्रम के माध्यम से पता चला कि आमिर नहाते समय शॉवर का इस्तेमाल करना पसंद नहीं करते हैं और वह भोजन विकार से ग्रस्त हैं।
25. आमिर ने फिल्म दंगल में अभूतपूर्व अभिनय कौशल से दर्शकों के मन को मोह लिया और जिसके चलते यह फिल्म दुनिया भर में 2000 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई करने वाली पहली भारतीय फिल्म बन गई और वर्ष 2017 में, चीन में सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म थी।
26. उन्हें फिल्म दंगल के लिए पहली बार 28 किलो वजन बढ़ाने के लिए कहा गया था और बाद में उन्हें एक युवा महावीर सिंह फोगाट बनने के लिए 25 किलोग्राम वजन घटाने के लिए कहा गया था जिसे उन्होंने महज 5-6 महीने में घटा दिया था, जिसके बाद उन्हें व्यक्तिगत रूप से राहुल भट्ट ने प्रशिक्षित किया। आमिर खान महावीर सिंह फोगाट की भूमिका में
27. फिल्म दंगल के निर्देशक नितेश तिवारी ने एक साक्षात्कार में खुलासा किया था कि आमिर शारीरिक कसरत करते समय गाली-गलौज का प्रयोग करते हैं।
28. उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि “उनके लिए गुणवत्ता मात्रा से ज्यादा महत्वपूर्ण है और जिसके कारण वह एक समय में एक ही फिल्म बनाते हैं।”
29. अभिनय के अलावा, वह एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं और यूनिसेफ (UNICEF) के एक आधिकारिक राजदूत हैं, जो कुपोषण जैसी बीमारी के लिए कार्य करता है। जिसे आमिर ने 40 से अधिक लघु फिल्मों में फिल्माया। आमिर खान यूनिसेफ समारोह के दौरान
30. आमिर की दूसरी पत्नी किरण राव ने सरोगेट के माध्यम से एक बेटे को जन्म दिया, जिसके बाद वह In vitro Fertilisation का प्रसार करने लगे। आमिर अपनी दूसरी पत्नी किरण राव और बेटे के साथ
31. आमिर वर्ष 1990 से ही मीडिया रिपोर्टिंग और पुरस्कार समारोहों में जाने से परहेज करते हैं, क्योंकि जब उन्हें फिल्म “दिल” के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रूप में नामांकित किया गया था, लेकिन बाद में उस पुरस्कार को फिल्म घायल के लिए सनी देओल को दिया गया था।
32. जब भी आमिर किसी फिल्म को साइन करते हैं, तो वह निर्देशक से कहते हैं कि पात्रों को जाने बिना ही पहले फिल्म की कहानी सुनाई जाए और फिर पूरी कहानी सुनने के बाद उन्हें जो भूमिका अच्छी लगती है वह उसको चुनते हैं।
33. आमिर रुबिक के क्यूब को हल करना काफी पसंद करते है और इस खेल में माहिर भी हैं। यहां एक वीडियो है जहां उन्होंने अपनी अगली फिल्म पर चर्चा करते हुए सिर्फ 36 सेकंड में क्यूब को हल किया है

Monday, 23 July 2018

Kajol Biography In Hindi - काजोल की जीवनी

Kajol Biography In Hindi - काजोल की जीवनी 


काजोल ने अपने बॉलीवुड करियर में खुद को एक लाजवाब और बेहतरीन एक्ट्रेस साबित किया। इसके साथ-साथ उन्हें बहुत से अवार्ड भी मिल चुके है। जिनमे छः फिल्मफेयर अवार्ड, 12 फिल्मफेयर नामनिर्देशन भी शामिल है। इसेक साथ ही उन्होंने बेस्ट एक्ट्रेस के पाँच फिल्मफेयर अवार्ड जीते है जो अपनेआप में ही एक रिकॉर्ड है। 2011 में भारत सरकार ने उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च अवार्ड पद्म श्री से सम्मानित किया था।


काजोल का जन्म मुंबई में मुखर्जी-समर्थ फिल्म परिवार में हुआ था। उनकी माता तनूजा एक एक्ट्रेस है और उनकी पिता शोमू मुखर्जी एक फिल्म डायरेक्टर और प्रोड्यूसर थे। 2008 में कार्डियक अरेस्ट आने की वजह से उनके पिता शोमू की मृत्यु हो गयी थी। काजोल की छोटी बहन तनिषा मुखर्जी भी एक एक्ट्रेस ही है। उनकी आंटी नूतन भी एक एक्ट्रेस ही थी और उनकी नानी शोभा समर्थ और परदादी रतन बाई दोनों ही हिंदी सिनेमा से जुडी हुयी थी। उनके पैतृक अंकल जॉय मुखर्जी और देब मुखर्जी, दोनों फिल्म प्रोड्यूसर थे जबकि पैतृक दादा सशाधर मुखर्जी एक फिल्मनिर्माता थे। काजोल के भाई-बहनो में रानी मुखर्जी, शर्बानी मुखर्जी और मोहनीश बेहल शामिल है, जो सभी बॉलीवुड में शामिल है।


अपने बचपन का वर्णन करने हुए काजोल खुद को बहुत ही शरारती बताती है। उन्होंने बताया की वह किशोरावस्था से ही बहुत जिद्दी थी। उनके अनुसार जब वह अल्पावस्था में ही थी तभी उनके माता-पिता अलग हो चुके थे, लेकिन तनूजा के अनुसार काजोल पर उनके अलग होना का कोई प्रभाव नही पड़ा था। माँ ना होने की वजह से काजोल की नानी और दादी काजोल का ख्याल रखती थी। अपनी नानी की तरफ देखते हुए काजोल हमेशा कहती है की, “मेरी नानी ने मुझे कभी मेरी मम्मी की कमी महसूस नही होने दी” । काजोल के अनुसार उनका पालन पोषण बंगाली और महाराष्ट्रियन दोनों संस्कृतियों में हुआ था।

काजोल ने पंचगनी की सेंट जोसफ कॉन्वेंट बोर्डिंग स्कूल से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की थी। पढाई के अलावा वह स्कूल के दिनों में दूसरी गतिविधियों में भी हिस्सा लेती थी, उन्हें डांस करना बहुत पसंद था। स्कूल के दिनों से ही काजोल को पढने और एक्टिंग का काफी शौक था। इसके बाद उन्होंने एक्टिंग के क्षेत्र में राहुल रवैल की फिल्म बेखुदी में काम करना शुरू किया। गर्मी की छुट्टियों में फिल्म की शूटिंग पूरी करने के बाद काजोल वापिस स्कूल आ गयी। इसके बाद एक्टिंग में ही फुल-टाइम करियर बनाने के लिये उन्होंने पढाई छोड़ने की ठानी।

काजोल ने एक्टिंग में पर्दापण एक असफल रोमांटिक ड्रामा फिल्म बेखुदी (1992) से किया था, उस समय में स्कूल में जाती थी। इसके बाद एक्टिंग सिखने के लिये उन्होंने पढाई छोड़ दी, और उनकी पहली कमर्शियल सफल फिल्म थ्रिलर बाज़ीगर (1993) थी। इसके बाद उन्होंने बहुत सी रोमांटिक ड्रामा फिल्मे भी की जिनमे उन्हें काफी सफलता मिली, उन फिल्मो में शाहरुख खान के साथ दिलवाले दुल्हनियाँ ले जायेंगे (1995), सलमान खान के साथ प्यार किया तो डरना क्या (1998), प्यार तो होना ही था (1998), कुछ कुछ होता है (1998) और कभी ख़ुशी कभी गम (2001)। 1997 में आयी फिल्म गुप्त में उनके द्वारा किये गए रोल की लोगो ने काफी प्रशंसा भी की। इसके बाद 1998 में आयी फिल्म दुश्मन में उनके किरदार की आलोचकों ने काफी प्रशंसा की। 2001 के बाद कुछ समय तक फिल्मो से दूर रहने के बाद 2006 में उन्होंने आमिर खान के साथ फिल्म फना की और फिर ड्रामा फिल्म यु, मी और हम की (2008), माय नेम इस खान (2010), वी आर फॅमिली (2010) और कॉमेडी ड्रामा फिल्म दिलवाले (2015) की। इन फिल्मो से ही उन्होंने खुद की भारत की सबसे सफलतम एक्ट्रेस साबित किया।

फिल्मो में एक्टिंग करने के साथ-साथ काजोल एक सामाजिक कार्यकर्ता भी है। उन्होंने विधवा महिलाओ और अनाथ बच्चो के हीत में बहुत से कार्य किये है। जिसके लिये उन्हें सन 2008 में कर्मवीर पुरस्कार भी दिया गया था। इसके बाद जी टीव्ही के रियलिटी शो, रॉक-एन-रोल फॅमिली में काजोल जज भी बनी थी और साथ ही वह देवगन एंटरटेनमेंट एंड सॉफ्टवेयर लिमिटेड में मेनेजर के पद पर भी कार्यरत है।

Kojal personal life story

फिल्मो में काम करते ही काजोल ने एक्टर अजय देवगन को डेट करना शुरू किया, 1994 में जब गुंडाराज की शूटिंग कर रहे थे तभी दोनों एक दूजे से प्यार करने लगे थे। दोनों का रंग अलग अलग होने की वजह से मीडिया के कुछ लोग उनकी काफी आलोचना भी कर रहे थे। लेकिन देवगन ने अपने रिश्ते के बारे में बताते हुए कहा था किम “हमने कभी रोज एक-दूजे को आय लव यु बोलने के लिये प्यार नही किया, ना ही हमारे बीच कोई प्रपोसल हुआ। बल्कि हम एक दूजे के साथ बड़े होते गए। शादी के बारे में हमने कभी सोचा तक नही था लेकिन: कभी ना कभी हो ही जाती।” अंततः 24 फरवरी 1999 को उन दोनों ने महाराष्ट्रियन तरीको से शादी कर ही ली। काजोल हमेशा कहती है की उन्होंने फिल्म करना पूरी तरह नही छोड़ा। शादी होने के बाद काजोल, देवगन के घर पर रहने लगी थी।

Kajol movie list


गुप्त : दी हिडन तरूर
दुश्मन
प्यार तो होना ही था
कुछ कुछ होता है
कभी ख़ुशी कभी गम
फना
यु, मी और हम
माय नेम इस खान
वी आर फॅमिली
दिलवाले


Kajol Facts In Hindi 

1- काजोल मुखर्जी खानदान की चौथी पीढ़ी हैं।  काजोल वेटरन एक्ट्रेस रत्ना बाई की परपोती हैं। 
2-कपूर फैमिली के बाद बॉलीवुड में मुखर्जी परिवार का भी काफी योगदान है।
3-  काजोल बॉलीवुड की अकेली ऐसी अभिनेत्री हैं जिन्हे नेगेटिव रोल के लिए फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
4- काजोल बॉलीवुड की दूसरी अभिनेत्री हैं जिन्हे पांच फिल्म फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड से नवाजा गया हैं।  काजोल की मौसी नूतन को भी पांच फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड से सम्मनित किया जा चूका है।
5 - क्या आप जानते हैं बाजीगर में प्रिया चोपड़ा के रोल के लिए डायरेक्टर्स की पहली पसंद श्रीदेवी थी, लेकिन उन्होंने डेट्स ना होने के कारण फिल्म निर्देशक को मना कर दिया , और फिल्म आकर गिरी काजोल की झोली में।  इसके साथ ही काजोल की यह फिल्म पहली सुपरहिट साबित हुई।
6- सिल्वर स्क्रीन पर काजोल-शाहरुख़ की जोड़ी ने हमेशा हिट फ़िल्में दी हैं।
7 - निर्देशक करण जौहर काजोल को अपना लकी चार्म मानते हैं, इसलिए वह उनकी फिल्म की हीरोइन होती हैं या फिर उनका फिल्म में कैमियो ।
8- काजोल बहुत बड़ी शिवभक्त भी हैं।  वह हमेशा ओम नाम की रिंग पहनती हैं। 

Thursday, 19 July 2018

Raj Kapoor Biography In Hindi - राजकपूर की जीवनी

Raj Kapoor Biography In Hindi - राजकपूर की जीवनी



राजकपुर जिनको इंडियन सिनेमा का Showman कहा जाता है , हिंदी सिनेमा के एक जाने माने अभिनेता , निर्माता और निर्देशक थे | उन्होंने अपने जीवन में 3 राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड्स और 11 फिल्मफेयर अवार्ड जीत है | आइये आपको उन्ही महान शो मेन राजकपूर साहब की जीवनी से रूबरू करवाते है |

Raj KapoorEarly life and background


Raj Kapoor राजकपूर का जन्म वर्तमान पाकिस्तान के पेशावर में ढक्की मुनव्वर शाह में एक हिन्दू पंजाबी परिवार में हुआ था | राजकपूर के जन्म के समय पेशावर भारत का ही अंग था |  Raj Kapoor राजकपूर के पिता का नाम पृथ्वीराज कपूर और माता का नाम रामसरणी देवी था | राजकपूर के पिताजी पृथ्वीराज कपूर भी एक महान अभिनेता थे जिन्हें हिंदी सिनेमा का पितामह माना जाता है |  पृथ्वीराज कपूर के पिता दीवान बशेश्वरनाथ कपूर और दादाजी केशवमल कपूर थे | पृथ्वीराज कपूर से कपूर खानदान की शुरवात होती है जो वर्तमान में हिंदी सिनेमा में सबसे बड़ा फ़िल्मी खानदान है |

पृथ्वीराज कपूर ने भारत की पहली बोलती फिल्म आलम आरा में सहायक अभिनेता के तौर पर अभिनय किया था | इससे पहले पृथ्वीराज कपूर ने भारत की नौ मूक फिल्मो में भी काम किया था | पृथ्वीराज कपूर का सबसे अच्छा अभिनय “सिकन्दर ” 1941  फिल्म में माना जाता है | 1944 में उन्होंने पृथ्वी थिएटर की स्थापना की थी और उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दिनों में मुगले-आजम और “कल आज और कल ” जैसी बेहतरीन फिल्मो में भी अभिनय किया था | पृथ्वीराज कपूर के छ: संताने थी जिसमे से राजकपूर सबसे बड़े थे | इसके अलावा दो बच्चो की बचपन में ही मौत हो गयी थी बाकि तीन जीवित रह गये थे | जिनमे शम्मी कपूर , शशि कपूर और एक बेटी उर्मिला सियाल थी | राजकपूर की तरह शम्मी कपूर और शशि कपूर ने भी फिल्मो में अपनी अलग पहचान बनाई |

विभाजन के बाद Raj Kapoor राजकपूर भारत आ गये और 1930 में देहरादून की "Colonel Brown Cambridge School" और "St Xavier’s Collegiate School "से अपने प्रारभिक शिक्षा प्राप्त की | राजकपूर ने बचपन से अपने पिता से पश्तो भाषा भी सीखी थी |

Rajkapoor as Child Artist



Raj Kapoor राजकपूर ने केवल पांच वर्ष की उम्र में एक नाटक “मृच्छकटिक” में काम किया था | 10 वर्ष के उम्र में पहली बार वप पर्दे पर “इन्कलाब ” फिल्म एम् नजर आये जो 1935 में रिलीज हुयी थी | इस फिल्म एम् मुख्य अभिनेता उनके पिताजी पृथ्वीराज कपूर और अभिनेत्री दुर्गा खोटे थी | इसके बाद राज कपूर ने बाल कलाकार के रूप में “गौरी ” और “After the Earthquake” जैसी फिल्मो में भी काम किया | उनके पिता उनको बाल कलाकार के रूप में ज्यादा नही देखना चाहते थे क्योंकि उन्हें डर था कि शुरुवात में ही अभिनय की वजह से बड़े होने पर उन्हें फिल्मो में काम शायद ना मिले |

Raj Kapoor राजकपूर बचपन से ही स्कूल के बात अपना अधिकतर समय अपने पिताजी के साथ बिताते थे जिसमे वो फिल्मो क्लेपर बॉय या ट्रोली पुलर का काम किया करते थे | Raj Kapoor राजकपूर के पिताजी ने शुरुवात से ही अपने बच्चो को मेहनत का महत्व समझाया था इसलिए उनसे फिल्म के क्रू मेम्बर की तरह व्यवहार करते थे और उन्हें जीवन की सीख दिया करते थे | राजकपूर ने केदार शर्मा के साथ सहायक के रूप में भी काम किया था | Raj Kapoor राजकपूर ने बॉम्बे टॉकीज की कई फिल्मो के लिए भी बतौर सहायक निर्देशक का काम किया था और इस तरह वो अपने पिता के पृथ्वी थिएटर और बॉम्बे टॉकीज दोनों के लिए काम करने लगे थे |

Rajkapoor as Film Assistant


पृथ्वीराज कपूर अपने पुत्र राज कपूर Raj Kapoor को बतौर सहायक की तनखाह के रूप में 201 रूपये महीना दिया करते थे | राजकपूर को अपनी पहली फिल्म में लीड रोल मिलने के पीछे एक कहानी है | राजकपूर उन दिनों केदार शर्मा के लिए Clapper Boy का काम किया करते थे और केदार शर्मा “विष कन्या” फिल्म बना रहे थे | शाम को इस फिल्म के दृश्य को फिल्माना था लेकिन राजकपूर को वहा पहुचने में देरी हो गयी | उस समय उनकी आदत थी वो थिएटर में जाते ही पहले कांच में खुद को देखते थे फिर बालो को सवारते थे | उस दिन Raj Kapoor राजकपूर की इस हरकत पर देरी हो जाने की वजह से केदार शर्मा ने गुस्सा होकर उनको थप्पड़ जड दिया | राजकपूर ने कोई  प्रतिक्रिया नही की और एक शब्द भी नही बोले |

केदार शर्मा को अपने इस काम पर बहुत बुरा लगा और अगली सुबह वो राजकपूर के पास गये और उन्हें अपनी अगली फिल्म “नीलकमल ” में हीरो का रोल देने का वादा किया | Raj Kapoor राजकपूर को जब हीरो के रोल का ऑफर दिया तो वो खूब रोये थे | जब शर्मा ने उनसे पूछा कि उन्होंने तो थप्पड़ रात को मारा था वो अभी क्यों रो रहा है तो राजकपूर ने जवाब दिया कि उनको रोना इसलिए आया कि एक डायरेक्टर ने उनको काम दिया इसलिए दिल भर आया था |  Raj Kapoor राजकपूर ने 1947 में केदार शर्मा की “नील कमल” बतौर हीरो अभिनय किया जिसमे उन्होंने मधुबाला के साथ काम किया था | इसी साल उन्होंने चार ओर फिल्मे “चितचोर ” दिल की रानी और जेल यात्रा में भी अभिनय किया जिसमे भी उनकी Co-star मधुबाला ही थी |

R.K. Studios Foundations & Films


इसके बाद सन 1948 में उन्होंने अपने खुद के स्टूडियो R. K. Film की स्थापना की |  उन्होंने पृथ्वी थिएटर से जो कुछ भी सीखा था वो सारा ज्ञान R. K. Film के स्टूडियो में लगा दिया था | R. K. Film के बैनर तले उन्होंने अपनी पहली फिल्म आग बनाई और उस दौर से सबसे कम उम्र के फिल्म निर्देशक बने | इस फिल्म के निर्माता , निर्देशन के साथ साथ मुख्य अभिनेता का किरदार भी उन्होंने ही निभाया था | इस फिल्म में उनके Co-star नर्गिस , कामिनी कौशल और प्रेमनाथ थे |  ये फिल्म काफी सफल रही |  इसके बाद 1949 में उन्होंने महबूब खान की फिल्म अंदाज में काम किया था जो बतौर अभिनेता उनकी पहली सफल फिल्म थी | इसी साल के अंत में उन्होंने बतौर निर्माता , निर्देशक और अभिनेता के रूप में अपनी पहली सफल फिल्म बरसात रिलीज की |

Rajkapoor Movies in 50s


R.K. Banner की अपनी पहली सफल फिल्म बरसात के बाद Raj Kapoor राजकपूर ने 50 के दशक में कई हिट फिल्मे दी |  50 के दशक में उन्होंने R.K. Banner के तले पहली फिल्म “आवारा” बनाई | आवारा फिल्म के लिए निर्माता और निर्देशन दोनों का ही काम राजकपूर ने किया | इस फिल्म में पहली बार असली बाप -बेटे की जोड़ी के रूप में पृथ्वीराज कपूर और राजकपूर नजर आये | उनके पिता के अलावा इस फिल्म में बाल कलाकार के रूप में उनके छोटे भाई शशि कपूर ने काम किया था | इस फिल्म में राजकपूर के साथ नर्गिस एक बार फिर रोमांटिक जोड़ी के रूप में नजर आये |


आवारा फिल्म ने Raj Kapoor राजकपूर को ना केवल भारत बल्कि पुरे विश्व में स्टार बना दिया | रूस , तुर्की ,अफ़ग़ानिस्तान और चीन में लोगो की जुबान पर “आवारा हु ” गाना छा गया | उस समय से रूस के लोग भारत में दो ही व्यक्तियों के नाम जानते थे पहले पंडित जवाहरलाल नेहरु और दुसरे राजकपूर | इस फिल्म की सफलता के बाद जब उन्होंने विदेश का दौरा किया तो लाखो लोगो की भीड़ उनको देखने के लिए जमा हो गयी और मुकेश द्वारा गाये गाने “आवारा हु ” को गाने लगे | इस फिल्म से राजकपूर और नर्गिस की रोमांटिक जोड़ी के अलावा मुकेश की आवाज को भी प्रसिद्ध कर दिया | इस तरह आवारा फिल्म उस समय की सबसे सफल फिल्मो से एक गिनी जाने लगी |

आवारा की अपार सफलता के तीन वर्ष बाद 1953 में फिर R.K. Banner के तले राजकपूर ने अपनी फिल्म “आह ” बनाई जिसमे भी राजकपूर और नर्गिस की जोड़ी थी | ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उतना कमाल नही कर पाई | 1954  में उन्होंने सामाजिक सरोकार पर आधारित फिल्म “बूट पोलिश” बनाई | ये  R.K. Banner की पहली फिल्म थी जिसमे राजकपूर एक लीड हीरो के रूप में नजर नही आये थे |  इस फिल्म ने भी फिल्मफेयर अवार्ड जीता था |  1955 में राजकपूर एक ओर हिट फिल्म “श्री 420 ” लेकर आये जिसमे उन्होंने “”भारतीय चार्ली चैपलिन ” की छवि को हिंदी सिनेमा पर उतारा | इस फिल्म के मुकेश द्वारा गाये जाना वाला गीत “मेरा जूता है जापानी ” स्वतंत्र भारत के लिए एक देशभक्ति गीत के रूप में उभरा |

1956 में एक बार फिर Raj Kapoor राजकपूर ने सामाजिक सरोकार पर आधारित फिल्म “जागते रहो ” बनाई | इस फिल्म की शूटिंग केवल रात को ही हुयी थी और पुरी फिल्म में राजकपूर कुछ नही बोलकर भी कई बाते कह जाते है | इस फिल्म में नर्गिस एक cameo रोल में नजर आती है जो R.K. Banner के साथ उनकी अंतिम फिल्म थी | ऐसा कहा जाता है कि लगातार कई फिल्मे साथ करने की वजह से राजकपूर और नर्गिस में नजदीकिय बढ़ गयी थी तब नर्गिस ने राजकपूर के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा लेकिन राजकपूर ने मना करते हुए कहा कि “मै अपनी पत्नी को अभिनेत्री नही बना सकता हु और अपनी अभिनेत्री को अपनी पत्नी नही बना सकता हु “| उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन में अन्य अभिनेताओ की तरह दरारे नही आने दी थी जबकि स्क्रीन पर उनके रोमांस का मुकाबला भी नही था |

नर्गिस ने इस फिल्म के बाद Raj Kapoor राजकपूर के साथ काम नही किया और सुनील दत्त से शादी कर ली जिन्होंने मदर इंडिया के सेट पर आग से उनकी जान बचाई थी | इस तरह एक रोमांटिक कपल का अंत हुआ था जिसने ढेरो युवाओ को प्रेम करना सिखाया था | 50 के दशक में राजकपूर के अन्य प्रसिद्ध फिल्मे चोरी चोरी , फिर सुबह होगी , अब दिल्ली दूर नही , दो उस्ताद , अनाडी जैसी फिल्मे थी जिसमे अधिकतर फिल्मो में सामाजिक संदेश छुपा हुआ था |

Rajkapoor Movies in 60s


60 के दशक में Raj Kapoor ने पहली सुपरहिट फिल्म  “जिस देश में गंगा बहती है ” दी जिसमे वो एक भले आदमी का किरदार निभाते है जो डाकुओ के बीच फंस जाता है | इस फ़िल्म में पद्मिनी और प्राण उनके सह कलाकार थे | इस फिल्म में मुकेश द्वारा गाये गये सभी गाने सुपर हिट हुए और लोगो की जुबान पर छा गये | इस फिल्म ने कई फिल्म फेयर अवार्ड भी जीते थे क्योंकि ये भी फिल्म एक सामाजिक संदेश पर आधारित थी जिसमे राजकपूर डाकुओ का ह्रुद्द्य परिवर्तन करने में सफल हो जाते है | इस फिल्म के बाद उन्होंने छलिया . नजराना , आशिक , एक दिल के सौ अफसाने और “दिल ही तो है” फिल्मो में काम किया |

1964 में राजकपूर ने फिर RK बैनर के तले एक दमदार फिल्म “संगम “बनाई जिसको उन्होंने खुद निर्मित और निर्देशित की | इस फिल्म में उनके सह कलाकार राजेन्द्र कुमार और वैजयंतीमाला थे | ये फिल्म एक लव ट्रायंगल थी जिसमे राजकपूर वैजयंतीमाला से प्यार करते है जबकि वैजयंतीमाला राजेन्द्र कुमार से प्यार करती है | Raj Kapoor राजकपूर की यह पहली रंगीन फिल्म थी और बतौर सफल अभिनेता उनकी अंतिम फिल्म थी |  इसके बाद 60 के दशक में उनकी कुछ और सफल फिल्मे भी आयी जिनमे Around the World (1966) , सपनों के सौदागर (1968) जैसी फिल्मे थी लेकिन ये फिल्मे उतनी सफल नही रही थी |

Rajkapoor Movies in 70s


1970 में Raj Kapoor राजकपूर ने अपने जीवन की सबसे प्रिय फिल्म “मेरा नाम जोकर” बनाई जिसमे भी राजकपूर स्वयं निर्माता और निर्देशक थे | इस फिल्म को बनाने में राजकपूर को छ: साल लग गये थे | इस फिल्म ने उन्होंने अपने पुत्र ऋषि कपूर को भी बाल कलाकार के तौर पर काम दिया था जिन्होंने इस फिल्म में राजकपूर के बचपन का किरदार अदा किया था | ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नही हुयी और उनके परिवार को आर्थिक नुकसान हुआ था लेकिन राजकपूर इस फिल्म को हमेशा दिल से लगाये रखते थे | इस फिल्म एक रिलीज के कुछ सालो बाद ये फिल्म दुबारा पर्दे पर उतारी गयी तब लोगो ने इसे खूब सराहा था |

1971 में Raj Kapoor राजकपूर ने अपने बड़े बेटे रणधीर कपूर को फिल्मो में उतार और “कल आज कल ” फिल्म बनाई | इस फिल्म में कपूर खानदान की तीनो पीढियों को एकसाथ दिखाया गया है साथ साथ रणधीर कपूर की उस समय होने वाली पत्नी बबीता ने भी कम किया था | ये फिल्म ज्यादा सफल नही रही लेकिन कपूर खानदान की यादे इस फिल्म में रह गयी | उसके बाद 1973 में उन्होंने अपने मंझले बेटे ऋषि कपूर को फिल्मो में उतारा और “बॉबी ” फिल्म बनाई |  इस फिल्म में डिंपल कपाडिया को अभिनेत्री के तौर पर उतारा गया | इस फिल्म की लव स्टोरी ने ऋषि कपूर और डिम्पल दोनों को रातो रात स्टार बना दिया |

इस फिल्म के बाद 1975 में Raj Kapoor राजकपूर अपने पुत्र रणधीर कपूर के साथ धरम करम फिल्म में दिखे | इसके बाद 70 के दशक के अंत तक उन्होंने female protagonists पर आधारित फिल्मे बनाना शुरू कर दिया | 1978 में उनकी फिल्म सत्यम शिवम सुन्दरम में उनके छोटे भाई शशि कपूर ने मुख्य अभिनेता और जीनत अमान ने अभिनेत्री के तौर पर काम किया | 70 के दशक में उनकी ओर प्रिसद्ध फिल्मे नौकरी , और दो जासूस थी |

Rajkapoor Movies in 80s


70 के दशक में महिलाओ पर आधारित फिल्मे बनाने का सिलसिला जो उन्होंने शुरू किया था वो 80 के दशक की शुरुवात में भी रहा | 1982 में अपने पुत्र को फिल्म प्रेम रोग में बतौर अभिनेता काम दिया जो काफी सफल फिल्म थी | इस फिल्म से पदमीनी कोल्हापुरी भी बहुत प्रसिद्ध हो गयी थी | 1985 में उन्होंने अपने सबसे छोटे बेटे राजीव कपूर को “राम तेरी गंगा मैली ” के जरिये फिल्मो में उतारा जो राजीव कपूर की एकमात्र सबसे सफल फिल्म थी | बतौर निर्माता और निर्देशक “राम तेरी गंगा मैली ” उनकी अंतिम फिल्म थी और 1982 में “वकील वधु: फिल्म में अंतिम बार फिल्मो में नजर आये थे |

उनका अंतिम एक्टिंग रोल 1984 में ब्रिटिश टीवी फिल्म “किम” में था जिसमे वो cameo appearance में नंजर आये थे | 1988 में उन्होंने अपनी मौत से पहले हीना फिल्म को शुरू कर दिया था जिसमे उनके पुत्र ऋषि कपूर और पाकिस्तानी अभिनेत्री ज़ेबा अख्तियार मुख्य कलाकार था | अपने पिता की मौत के बाद रणधीर कपूर ने इस फिल्म को पूरा किया और 1991 में इस फिल्म को रीलीज किया | भारत -पाकिस्तान के रिश्तो पर आधारित ये फिल्म भी उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था जिसे देखने के लिए वो जीवित नही रह सके थे |

Personal life and Death



1946 में Raj Kapoor राजकपूर ने कृष्णा मल्होत्रा से शादी की जिनके पिताजी राजकपूर के पिता के मामा थे | इस तरह वैसे तो दूर के रिश्ते की कजिन थी लेकिन उस समय परिवार के आस पास ही रिश्ते देखे जाते थे | उनकी शादी एक arrange मैरिज थी जिसे उनके पिता ने तय किया था | 1946 में जब उनकी शादी हुयी तो एक मैगज़ीन में शादी के बाद राजकपूर के करियर के खत्म होने की बात कही लेकिन राजकपूर ने इन बातो को गलत साबित करते हुय ना केवल एक बेहतरीन कलाकार बल्कि एक अच्छे पति भी बने | राजकपूर की पत्नी कृष्णा ने भी अपने परिवार को बखूबी सम्भाला और राजकपूर के करियर में कभी बाधा नही बनी थी | कृष्णा के भाई राजेद्र नाथ , प्रेम नाथ और नरेंद्रनाथ भी बाद में अभिनेता बने और उनकी बहिन उमा ने प्रसिद्ध विलन प्रेम चोपड़ा से शादी की |

Raj Kapoor राजकपूर को हमेशा से अपनी एक्ट्रेस के साथ रोमांस करते हुए देख लोगो ने प्रेम बंधन में बंधे होने की बात कही | शुरुवात में नर्गिस के साथ इतनी फिल्मे करने के बाद लोगो के मन में इन दोनों के बीच प्रेम की बाते उडी लेकिन राजकपूर ने जनता के सामने इस बात को नकार दिया | राजकपूर ने कभी अपनी पत्नी का साथ नही छोड़ा जिसके फलस्वरूप नर्गिस ने सुनील दत्त से शादी कर ली थी | राजकपूर का इसके बाद वैजयंतीमाला के साथ संगम फिल्म में अफेयर होने की बाते उडी लेकिन वैजयंतीमाला ने इसे नकार दिया | इसके बाद भी हर अभिनेत्री के साथ राजकपूर का नाम जोड़ा गया लेकिन राजकपूर ने बिना क्रोध किये इन सब बातो को नकारा |

कपूर खानदान के बारे में कौन नही जानता है क्योंकि ये हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा और पुराना फ़िल्मी परिवार है | राजकपूर के तीनो बेटो रणधीर कपूर , ऋषि कपूर और राजीव कपूर ने फिल्मो में काम किया जिसमे में ऋषि कपूर सबसे ज्यादा सक्रिय रहे थे | इसके बाद अगली पीढ़ी में रणधीर कपूर की बेटी करिश्मा कपूर ने फिल्मो में आगमन किया जो एक बहुत सफल अभिनेत्री रही | करिश्मा की तरह ही बाद में उनकी बहन करीना भी वर्तमान समय में फिल्मो में सक्रिय है |ऋषि कपूर का बेटा रणधीर कपूर ने भी कपूर खानदान का नाम रोशन किया और कई सफल फिल्मे अपने नाम की |

Raj Kapoor राजकपूर अपने अंतिम दिनों में अस्थमा से पीड़ित थे और 63 वर्ष की उम्र में 1988 को इस दुनिया से विदा हो गये | जिस समय उनको अस्थमा के अटैक के लिए एम्स में भर्ती किया गया था उस समय उनको दादा साहब फाल्के पुरुस्कार मिलने वाला था | अस्थमा की वजह से वो एक महीने तक भर्ती रहे थे |


Interesting Facts About Raj Kapoor


1.उनका जन्म पठानी हिन्दू परिवार में हुआ था।

2.उन्हें 11 फिल्मफेयर ट्राफियां, 3 राष्ट्रीय पुरस्कार, ‘पद्म भूषण’, ‘दादासाहेब फाल्के पुरस्कार’ और ‘फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’, इत्यादि पुरस्कारों सम्मानित किया गया है। राज कपूर, वैजयन्ती माला और गीतकार शैलेंद्र |

3.उनकी सुपर हिट फिल्में हैं- आवारा (1951), अनहोनी (1952), आह (1953), श्री 420 (1955), जागते रहो (1956), चोरी-चोरी (1956), अनाड़ी (1959), जिस देश में गंगा बहती है (1960), छलिया (1960), दिल ही तो है (1963), इत्यादि।

4.वर्ष 1930 में, उनके पिता पृथ्वीराज कपूर अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने के लिए मुंबई आए, जहां उन्होंने कई मंच प्रदर्शन किए और इसके साथ ही वह 80 लोगों के एक समूह के साथ भारत भर में विभिन्न स्थानों पर यात्रा भी करते थे।

5.वर्ष 1931 में, राज कपूर के भाई देवी कपूर का निमोनिया की बीमारी से निधन हो गया था और उसी वर्ष उनके दूसरे भाई का निधन बगीचे में बिखरी जहरीली चूहों को मारने वाली गोलियां निगलने से हुआ था।

6.उन्होंने प्रसिद्ध हिंदी फिल्म निर्देशक किदार शर्मा के साथ एक क्लैपर बॉय के रूप में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। राज कपूर अपने पुरस्कारों के साथ

7.एक बार जब राज कपूर ने किदार शर्मा की नकली दाढ़ी को गलती से पकड़ लिया, तब गुस्से में किदार शर्मा ने राज कपूर को थप्पड़ मार दिया था।

8.अपने करियर के प्रारंभिक दिनों के दौरान वह एक संगीत निर्देशक बनना चाहते थे।

9.वर्ष 1948 में चौबीस साल की उम्र में राज कपूर ने “आरके फिल्म्स” कंपनी को आरम्भ किया और जिसके अंतर्गत फिल्म “आग” का निर्देशन किया।  राज कपूर आरके फिल्म्स में नरगिस के साथ

10.राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर ने उनकी शादी अपने मामा की बेटी कृष्णा से करवाई।

11.कृष्णा की बहन प्रेम चोपड़ा की पत्नी हैं और उनके भाई नरेन्द्र नाथ, राजेंद्र नाथ और प्रेम नाथ कृष्णा के बाद अभिनेता बने।

12.जब वैजयन्ती माला उनके जीवन में आईं, तब उस समय कृष्णा अपना घर छोड़कर अपने बच्चों के साथ नटराज होटल में रहने लग गई थीं और जिसके बाद वह अपने पिता के घर चली गईं।

13.उनके पुत्र ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा ‘खुल्लम खुल्ला’ में राज कपूर के विभिन्न अभिनेत्रियों के साथ संबंधो का खुलासा किया है।

14.उनके पहले बेटे रणधीर ने अभिनेत्री बबिता के साथ शादी की है और दूसरे बेटे ऋषि ने अभिनेत्री नीतू सिंह से विवाह किया है। प्रसिद्ध बॉलीवुड सितारे करिश्मा कपूर और करीना कपूर उनकी पोतियां (रणधीर कपूर और बबिता की बेटियां) हैं और प्रमुख अभिनेता रणबीर कपूर उनके पोते हैं (ऋषि और नीतू सिंह के बेटे)।

15.रणबीर उनके पसंदीदा पोते हैं, एक बार रणबीर ने उन्हें रूस में जाने के समय एक सूट की मांग की और जिसके चलते राज कपूर वहां से उनके लिए सभी संभव रंगों में सूट के दो बैग लाए।

16.उनकी बेटी रितु नंदा के बेटे निखिल नंदा ने श्वेता बच्चन से शादी की, जो प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की बेटी हैं। निखिल नंदा और श्वेता नंदा अमिताभ बच्चन के परिवार के साथ

17.दिलीप कुमार के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध थे, जिसके चलते उन्होंने दिलीप कुमार की बारात की अगुवाई अपने पिता पृथ्वीराज कपूर और प्रसिद्ध अभिनेता देव आनंद के साथ की। राज कपूर देव आनंद और दिलीप कुमार के साथ

18.फिल्म निर्माता विजय आनंद ने राज कपूर, दिलीप कुमार, और देव आनंद के साथ एक फिल्म निर्देशित करने की कोशिश की, लेकिन किसी कारणवश वह फिल्म नहीं बन पाई।

19.वह विभिन्न देशों जैसे कि – चीन, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व, अफ्रीका, तुर्की, सोवियत संघ, इत्यादि में काफी प्रसिद्ध हैं।

20.फिल्म ‘बॉबी’ का एक दृश्य जिसमें ऋषि कपूर अपने घर में डिंपल कपाड़िया से मिलते हैं, वह दृश्य राज कपूर और अभिनेत्री नरगिस के वास्तविक जीवन पर आधारित था। राज कपूर की सुपरहिट फिल्म बॉबी

21.उन्होंने 20 से अधिक फिल्मों में संगीत निर्देशक शंकर-जयकिशन के साथ मिलकर कार्य किया। राज कपूर मोहम्मद रफ़ी और शंकर जयकिशन के साथ

22.प्रसिद्ध गायकों मन्ना डे और मुकेश ने उनके गीतों को आवाज दी। मुकेश की मृत्यु के समय उन्होंने कहा कि “उन्होंने अपनी आवाज को खो दिया।” राज कपूर गायक मुकेश के साथ

23.उन्हें प्रसिद्ध फ़िल्में आवारा (1951) और बूट पोलिश (1954) के लिए फ्रांस में आयोजित कांन्स फिल्म समारोह में “पालमे डी ऑर” पुरस्कार के लिए दो बार नामांकित किया गया।

24.वर्ष 1956 में, उन्हें फिल्म “जागते रहो” के लिए कार्लोवी वेरी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (कार्लवी वेरी, चेक रिपब्लिक) में क्रिस्टल ग्लोब पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

25.उनकी पहली रंगीन फिल्म संगम (1964) थी। राज कपूर की पहली रंगीन फिल्म संगम (1964)

26.वर्ष 1965 में, वह चौथे मास्को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में जूरी के सदस्य बने।

27.उनकी एराउंड द वर्ल्ड (1966) और सपनों का सौदागर (1968) फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप थी।

28.‘मेरा नाम जोकर’ (1970) वह फिल्म थी जिसे उन्होंने स्वयं निर्देशित किया था और स्वयं ही निर्मित किया था। शुरुआती असफलताओं के बाद फिल्म सुपरहिट साबित हुई। राज कपूर की पसंदीदा फिल्म मेरा नाम जोकर (1970)

29.उनकी फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ भारत की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में से एक है और यह पहली हिंदी फिल्म है जो दो अंतराल होने के बावजूद साढ़े चार घंटे चली थी। यह फिल्म उनके पुत्र ऋषि कपूर की पहली फिल्म थी। राज कपूर की प्रसिद्ध फिल्म मेरा नाम जोकर

30.फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम के निर्माण के दौरान, जब राज कपूर एक उपयुक्त अभिनेत्री की खोज कर रहे थे, तभी ज़ीनत अमान एक गांव की पोशाक में उनके कार्यालय पहुंच गई थीं, जहां राज कपूर जीनत की प्रतिभा को देखकर काफी प्रभावित हुए और उन्हें फिल्म के लिए चुन लिया गया। राज कपूर और ज़ीनत अमान

31.जब वह खराब स्वास्थ्य से पीड़ित थे, तब उनके दोस्त और निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने राज कपूर के सम्मान में फिल्म ‘आनंद’ का निर्माण किया।

32.वर्ष 1987 में, जब उन्हें सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम में ‘दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड’ प्राप्त करने के लिए आमंत्रित किया गया था, तब उन्होंने अपने खराब स्वास्थ्य के बावजूद वहां जाने पर सहमति व्यक्त की और जब उनका नाम सम्मान प्राप्त करने के लिए घोषित किया गया, तब उन्होंने महसूस किया कि उनकी छाती बहुत तेज दर्द कर रही है, यह देखकर आर. वेंकटरमन (पूर्व भारतीय राष्ट्रपति) उन्हें मंच से नीचे ले गए। उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें तुरंत एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) में ले जाया गया। राज कपूर दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड प्राप्त करते हुए

33.उसके बाद एक महीने तक वह एक कृत्रिम श्वसन प्रणाली के द्वारा जीवन के लिए संघर्ष करते रहे। अंत में, महज 63 वर्ष की उम्र में हृदयाघात (दिल का दौरा) के कारण उनका निधन हो गया।

34.अपने खराब स्वास्थ्य के समय वह फिल्म ‘हिना’ पर काम कर रहे थे, जिसे बाद में उनके बेटों ऋषि कपूर और रणधीर कपूर द्वारा पूरा किया गया था।

35.14 दिसंबर 2001 को, भारतीय डाक सेवा ने राज कपूर के सम्मान में एक टिकट जारी किया। राज कपूर के सम्मान में जारी एक डाक टिकट

36.मार्च 2012 में, बांद्रा बैन्डस्टैंड, मुंबई, वॉक ऑफ द स्टार्स में उनकी पीतल की प्रतिमा को रखा गया था। राज कपूर की पीतल की प्रतिमा

37.उनकी फिल्म “श्री 420”, “आग” और “जिस देश में गंगा बहती है” और उनका प्रसिद्ध गीत ‘मेरा जूता है जापानी’ देशभक्ति की भावना को जागृत करता है और यह इतने लोकप्रिय हैं कि आज भी इन्हें कई फिल्मों में फिल्माया गया है।

38.राज कपूर ही शंकर जयकिशन (संगीत निर्देशक), शैलेंद्र (गीतकार) और हसरत जयपुरी (गीतकार) को फिल्म उद्योग में लेकर आए थे।

Govinda Biography In Hindi - गोविंदा की जीवनी

Govinda biography in hindi - गोविंदा का जीवन परिचय 



  गोविंदा (जन्मनाम – गोविंद अरुण आहूजा) एक भारतीय फिल्म अभिनेता, कॉमेडियन और भूतपूर्व राजनेता है, जो हिंदी फिल्मो में अपने बेहतरीन कलाकारी के लिए जाने जाते है। गोविंदा अपनी अनोखी नृत्य कला के लिए भी प्रसिद्ध है।

अपने जीवनकाल में गोविंदा को अबतक 12 फिल्मफेयर अवार्ड नामनिर्देशन, एक विशेष फिल्मफेयर अवार्ड और बेस्ट कॉमेडियन का फिल्मफेयर अवार्ड और चार जी सिने अवार्ड मिल चुके है। इसके साथ ही गोविंदा 2004 से 2009 तक संसद भवन के सदस्य भी रह चुके है। Govinda की पहली फिल्म 1986 में इल्जाम आयी थी और अबतक वे तक़रीबन 165 हिंदी फिल्मे कर चुके है। बीबीसी न्यूज़ ऑनलाइन पोल में सर्वाधिक वोट पाने वाले की सूचि में वे दसवे स्थान पर थे।

Govinda life 

1980 के समय में, गोविंदा ने बहुत सी पारिवारिक, ड्रामा, एक्शन और रोमांस फिल्मे की। 80 के दशक में उन्होंने बॉलीवुड में एक्शन हीरो के रूप में अपनी पहचान बनायी और फिर 90 के दशक में उन्होंने अपनी पहचान एक हास्य अभिनेता के रूप में बनायी थी। एक समय में जब उनकी फिल्मो को लगातार असफलता मिल रही थी तब उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ फिर वापसी की और एक सुपरहिट फिल्म दी।

आने वाले दशको में उन्होंने 1992 की फिल्म शोला और शबनम में NCC कैडेट की भूमिका निभाई थी, इस फिल्म में उन्होंने दिव्या भारती के साथ काम किया था। गोविंदा ने बहुत सी कॉमेडी फिल्मो में हीरो की भूमिका भी निभाई है, जिनमे मुख्य रूप से फिल्म आँखे (1993), राजा बाबु (1994), कुली नं. 1 (1995), हीरो नं. 1 (1997) और हसीना मान जाएँगी (1999) शामिल है।

करिश्मा कपूर के साथ आयी हसीना मान जाएँगी फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन अवार्ड और साजन चले ससुराल के लिए उन्हें फिल्मफेयर विशेष अवार्ड मिला था। इसके बाद गोविंदा ने बहुत सी फिल्मो में डबल रोल की भूमिका भी निभाई जिनमे मुख्य रूप से जान से प्यारा (1992), आँखे (1993), बड़े मियाँ छोटे मियाँ (1998) और अनाड़ी नं. 1 (1999) शामिल है।

इसके बाद उन्होंने हद कर दी आपने (2000) फिल्म में एक साथ 6 रोल निभाए थे, उनके उन किरदारों के नाम राजू और उनकी माँ, पिता, बहन, बड़ी माँ और बड़े पापा थे।

लेकिन फिर सन 2000 में बॉक्स ऑफिस में बहुत सी फ्लॉप फिल्मे करने के बाद उन्होंने फिल्म अक्षय कुमार के साथ भागम भाग (2006), सलमान खान और कैटरीना कैफ के साथ पार्टनर (2007), लाइफ पार्टनर (2007), लाइफ पार्टनर (2009) जैसी बहुत सी सफल फिल्मे की। इसके बाद सन 2015 में उन्होंने जी-टीवी के डांस रियलिटी शो, डांस इंडिया डांस सुपर मॉम सीजन 2, मिथुन चक्रवर्ती की जगह पर जज की भूमिका भी निभाई थी।

गोविंदा (भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के सदस्य) की नियुक्ती 2004 में 14वे लोकसभा चुनाव में भारत के महाराष्ट्र के उत्तर मुंबई क्षेत्र से संसद भवन के सदस्य के रूप में नियुक्ती की गयी थी। लोकसभा चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राम नाइक को पराजीत किया था।

Govinda Early Life

गोविंदा (Govinda) का जन्म 21 दिसम्बर 1963 को हुआ। उनके पिता भूतपूर्व अभिनेता अरुण कुमार और उनकी माता गायिका-अभिनेत्री निर्मला देवी है। उनका जन्म एक पंजाबी-सिंधी परिवार में हुआ था। अरुण खास तौर पर अपनी फिल्म महबूब खान की फिल्म औरत (1940) के लिए प्रसिद्ध है।

उन्होंने एक ही फिल्म प्रोड्यूस की थी और इसके कुछ समय बाद ही उन्हें बिमारियों ने घेर लिया था। उनका परिवार मुंबई के कार्टर रोड पर रहता था लेकिन बाद में वे वहाँ से उत्तर मुंबई में स्थापित हो गये थे, जहाँ गोविंदा का जन्म हुआ। अपने माता-पिता की छः संतानों में से गोविंदा सबसे छोटे है। घर में उन्हें उपनाम “ची-ची” भी दिया गया था, जिसका पंजाबी अर्थ “छोटी ऊँगली” से है, घर पर उन्हें इसी नाम से पुकारा जाता था।

उनका भाई कीर्ति कुमार एक अभिनेता, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर है। उनकी बहन, कामिनी खन्ना एक राइटर, म्यूजिक डायरेक्टर और गायिका है।

गोविंदा (Govinda) के अंकल आनंद सिंह (डायरेक्टर हृषिकेश मुखर्जी के असिस्टेंट), ने गोविंदा (Govinda) को फ़िल्म तन-बदन में परिचित करवाया था। सिंह की भाभी सुनीता उस समय गोविंदा के प्यार में पड़ चुकी थी और उन्होंने 11 मार्च 1987 को उन्होंने शादी कर ली थी।

उनकी दो संताने है : एक बेटी टीना और एक बेटा यशवर्धन है। टीना ने 2015 में आयी फिल्म ‘सेकंड हैण्ड हसबंड’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था।

मनोरंजन के क्षेत्र में गोविंदा (Govinda) के छः भतीजे और दो भांजीयाँ है: अभिनेता विनय आनंद, कृष्णा अभिषेक, आर्यन, अर्जुन सिंह, रागिनी खन्ना, अमित खन्ना, आरती सिंह और डायरेक्टर जनमेंद्र कुमार आहूजा।

5 जनवरी 1994 को खुद्दार फिल्म की शूटिंग के लिए स्टूडियो पर जाते समय गोविंदा (Govinda) के साथ एक दर्दनाक हादसा हुआ था। गोविंदा (Govinda) की कार दूसरी कार से टकरा गयी थी और इसकी वजह से उनके सिर में गंभीर चोट लग गयी थी। लेकिन फिर भी गोविंदा ने शूट करने से इन्कार नही किया बल्कि डॉक्टर को एकबार दिखाने के बाद उन्होंने आधी-रात तक काम किया था।

Govinda Political Career

2004 में गोविंदा (Govinda) कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गये और इसके बाद लोकसभा चुनाव में मुंबई से उनकी नियुक्ती संसद भवन के सदस्य के रूप में की गयी थी। चुनाव में वे 50,000 वोटो से जीते थे।

चुनाव के समय में, उन्होंने बताया था की उनका एजेंडा प्रवास, स्वास्थ और ज्ञान है। प्रवास के क्षेत्र में उन्होंने बोरीवली-विरार में बहुत से कार्य किये है। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार उन्होंने स्वास्थ और शिक्षा के क्षेत्र में भी बहुत से कार्य किये थे। ठाणे जिल्हा कलेक्टर ने एक इंटरव्यू में कहाँ था की, गोविंदा (Govinda) ने अपने “लोकल एरिया डेवलपमेंट फण्ड” से वसई और विरार में पिने के पानी की समस्या को दूर करने के लिए पैसे दिए थे।

Interesting facts about govinda 



1.गोविंदा (Govinda) का बचपन बहुत मुश्किलों में बिता क्योंकि उनके पिता एक अभिनेता थे और वह बहुत व्यस्त रहते थे। जिसके दौरान वह गोविंदा को समय नहीं दे पा रहे थे।

2.1947 में, भारत- पाकिस्तान विभाजन के बाद उनके पिता पाकिस्तान के गुजरांवाला क्षेत्र से पंजाब में आए।

3.उनकी माँ नज़ीम मुस्लिम समुदाय से थीं, विवाह के उपरांत हिन्दू धर्म में परिवर्तन से उनका नाम निर्मला देवी रखा गया।

4.गोविंदा (Govinda) को होटल ताज में प्रबंधक की नौकरी से मना कर दिया गया था क्योंकि उन्हें अंग्रेजी भाषा का कम ज्ञान था।

5.अपनी पहली फिल्म इल्जाम में, नृत्य के साथ “आई एम ए स्ट्रीट डांसर” गीत भी गाते है |

6.गोविंदा (Govinda) अपनी फिल्म “हत्या और स्वर्ग” को छोड़कर अपनी किसी अन्य फिल्म को पसंद नहीं करते।

7.1994 में, एक सड़क दुर्घटना में उनके सिर पर काफी गहरी चोट लगने पर भी फिल्म में अपनी भूमिका को अच्छे ढंग से निभाया।

8.1999 में, बीबीसी न्यूज़ के द्वारा रंगमंच के दसवें सबसे महान सितारे के रूप में सम्मानित किए गए।

10.90 के दशक के दौरान, उन्होंने स्वयं को एक बेहतरीन हास्य कलाकार में परिवर्तित कर दिया और कादर खान के साथ उनकी जोड़ी काफ़ी सराहनीय रही।

11.उन्हें ताल, गदर और देवदास जैसी हिट फिल्मों में भूमिका के लिए प्रस्ताव आया, लेकिन उन्होंने कार्य करने से मना कर दिया।

12.उन्होंने 2004 में कांग्रेस पार्टी के साथ अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया और भारतीय जनता पार्टी के राम नाईक को हराकर लोकसभा सदस्यता हासिल की, वर्ष 2008 में उन्होंने राजनीति से सन्यास ले लिया।

13.गोविंदा (Govinda) ने जब सलमान खान से शुल्क लेने से मना कर दिया तो सलमान खान ने इसके एवज में गोविंदा को मर्सिडीज बेंज कार उपहार स्वरूप भेंट की।

Akshay Kumar Biography in Hindi - अक्षय कुमार जीवन परिचय

Akshay Kumar Biography in Hindi - अक्षय कुमार जीवन परिचय


Akshay Kumar Life 


वास्तविक नाम :- राजीव हरी ओम भाटिया
उपनाम  :- अक्की, राजू, मैक और खिलाड़ी कुमार
व्यवसाय :- अभिनेता और निर्माता


Akshay Kumar Physical structure


लम्बाई 180से० मी० ,1.80मी० ,5फीट ’ 11इन्च-”
वजन/भार :-  लगभग 80 कि० ग्रा०
शारीरिक संरचना :- लगभग -छाती: 42 इंच ,कमर: 34 इंच ,Biceps: 16 इंच

आँखों का रंग :- गहरा भूरा
बालों का रंग :- काला

Akshay Kumar personal life



जन्मतिथि :- 9 सितंबर 1967
आयु :- 2018 के अनुसार 51 वर्ष
जन्मस्थान :- अमृतसर, पंजाब, भारत
राशि :- कन्या
राष्ट्रीयता :- भारतीय
हस्ताक्षर :- अक्षय कुमार हस्ताक्षर
गृहनगर :- वह दिल्ली (चांदनी चौक) में रहते थे, लेकिन वर्तमान में वह मुंबई में रहते हैं
स्कूल/विद्यालय :- डॉन बोस्को हाई स्कूल, मिरीक, दार्जिलिंग महाविद्यालय/विश्वविद्यालय गुरु नानक खालसा कॉलेज (किंग्स सर्किल) मुंबई
शैक्षिक योग्यता ज्ञात नहीं
डेब्यू :- फिल्म (अभिनेता) : सौगंध (1991)
अक्षय फिल्म सौगंध में


Akshay Kumar family 


 पिता - स्वर्गीय हरि ओम भाटिया
माता :- अरुणा भाटिया

भाई :- ज्ञात नहीं
बहन :- अलका भाटिया

धर्म :- हिन्दू
पता :- प्राइम बीच, जुहू, मुंबई

Akshay Kumar Hobbies / Interests


पुरानी बॉलीवुड फिल्मों के पोस्टर इकट्ठा करना, खाना पकाना, मार्शल आर्ट्स खेलना, वॉलीबॉल और क्रिकेट खेलना


Akshay KumarConflict



अक्षय कुमार विवादों में तब आए, जब उनकी पत्नी ट्विंकल खन्ना ने मुंबई में "लेक्मे फैशन वीक" प्रमोशन के दौरान उनकी जीन्स उतार दी थी।


Akshay Kumar Favorite things


पसंदीदा भोजन थाई ग्रीन चिकन करी, मिसो सूप, सुशी, साशिमी, चॉकलेट फ़ज़
पसंदीदा अभिनेता :- रणवीर सिंह और कमल हासन
पसंदीदा अभिनेत्री :- श्रीदेवी

पसंदीदा फिल्म :- लाइफ इज ब्यूटीफुल
पसंदीदा रंग :- नीला
पसंदीदा खेल :- क्रिकेट, मार्शल आर्ट्स, नौकायन
पसंदीदा स्थान :- गोवा और कनाडा

Akshay Kumar Love affairs and other


वैवाहिक स्थिति :- विवाहित
गर्लफ्रेंड एवं अन्य मामलें :- पूजा बत्रा (अभिनेत्री),रवीना टंडन (अभिनेत्री),शिल्पा शेट्टी (अभिनेत्री)
     
ट्विंकल खन्ना (अभिनेत्री)
पत्नी ट्विंकल खन्ना अभिनेत्री (2001- वर्तमान)

विवाह तिथि 17 जनवरी 2001
बच्चे

बेटी - नितारा

बेटा - आरव

Akshay Kumar Wealth / Property related details


कार संग्रह पोर्श कायेने, होंडा सीआरवी, बेंटले कॉन्टिनेंटल जीटी, मर्सिडीज
बाइक संग्रह यामाहा वीएमएक्स और हार्ले डेविडसन
वेतन 25 करोड़ / फिल्म (भारतीय रुपए)
संपत्ति (लगभग) $150 मिलियन
कार संग्रह मर्सिडीज़ जेड क्लास, रेंज रोवर, फेरारी, मासेराटी, बीएमडब्ल्यू जेड 4, टोयोटा सेलिकिका
वेतन 25 करोड़ / फिल्म (भारतीय रुपए)
संपत्ति (लगभग) 96517457 करोड़ रुपए


 Interesting Facts About  Akshay Kumar


1.अक्षय कुमार का जन्म अमृतसर के पंजाबी परिवार में हुआ, परन्तु उनका पालन पोषण पुरानी दिल्ली में हुआ। कुछ वर्षों के बाद वह मुंबई के कोल्लीवाड़ा में स्थानांतरित हो गए।
2.बचपन से ही अक्षय का अभिनय और फिटनेस के प्रति लगाव रहा है।
3.उनके पिता काफी सहयोगी थे, और उन्होंने मार्शल आर्ट प्रशिक्षण के लिए अक्षय को बैंकॉक भेज दिया था। परन्तु उनके पिता की शर्त थी कि यदि अक्षय अपनी बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी से अंक प्राप्त करते हैं तो उन्हें मार्शल आर्ट प्रशिक्षण के लिए बैंकॉक भेज देंगे। अक्षय ने बोर्ड की परीक्षा में 63% अंक प्राप्त करके बैंकॉक की टिकट प्राप्त की। वहां उनके चाचा मेट्रो गेस्ट हाउस में वेटर का कार्य करते थे, जहां उन्हें 1500 रुपए पारितोषिक मिलता था। वह खाना बनाते हुए मार्शल आर्ट भी सीखते थे।
4.बॉलीवुड में आने से पहले अक्षय कुमार ने कई छोटे मोटे काम भी किए। उन्होंने कोलकाता स्थित एक (Travel Agency) में डेढ़ साल तक चपरासी का काम किया।
5.अपने दोस्त के सुझाव पर, उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम बढ़ाया और उन्हें सफलता भी प्राप्त हुई। जिसके बाद उन्होंने राजीव ओम भाटिया से अपना नाम बदलकर अक्षय कुमार रख लिया। यह नाम (अक्षय) उन्होंने एक फिल्म से प्रेरित होकर रखा जिसमें उनकी पसंदीदा अभिनेत्री फिल्म के अभिनेता को “अक्षय” नाम से पुकारती थी।
6.90 के दशक में, राजेश खन्ना ने जय शिव शंकर नामक एक फिल्म बनाई। जिसमें उन्हें एक नए चेहरे की आवश्यकता थी, और जब अक्षय को इस के बारे में पता चला तो वह ऑडिशन के लिए राजेश खन्ना के कार्यालय पहुँच गए। जहाँ चार घंटे तक इन्तजार करने के बावजूद भी वह राजेश खन्ना से नहीं मिल पाए।
7.उनकी पहली फिल्म आज (1947) में उनका किरदार सिर्फ सात सेकंड का था जिसमें वह एक कराटे प्रशिक्षक के किरदार में थे।
8.पहली बार मुंबई आने पर उन्होंने अपने निवास स्थान जुहू बंगले पर एक पोर्टफोलियो शूट (Portfolio Shoot) करवाया। अक्षय कुमार जुहू बंगले पर
9.हालांकि उनकी पहली प्रदर्शित फिल्म “सौगंध” थी, लेकिन शुरुआत में उन्होंने “दीदार” के लिए हाँ भरी थी। फिल्म “फूल और कांटे” के लिए पहली पसंद अक्षय कुमार ही थे चूंकि उन्होंने अपनी सारी तारीखे “दीदार” को दे रखी थीं इसलिए “फूल और कांटे” अजय देवगन के पास चली गई।
10.अपने अभिनय करियर के तीन दशकों में अक्षय कुमार ने आठ बार “विजय” और सात बार “राज” की भूमिका निभाई।
11.बॉलीवुड में अक्षय कुमार खिलाड़ी नाम से बहुत लोकप्रिय हैं। क्योंकि उन्होंने “खिलाड़ी” शीर्षक की आठ फिल्मों में अभिनय किया : खिलाड़ी, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, सबसे बड़ा खिलाड़ी, खिलाड़ियों का खिलाड़ी, इंटरनेशनल खिलाड़ी, मिस्टर एंड मिसेज़ खिलाड़ी, खिलाड़ी 420 और खिलाड़ी 786।
12.अक्षय कुमार बॉलीवुड में सबसे अनुशासित और योग्यतम अभिनेताओं में गिने जाते हैं और वह समय के बहुत पाबंद हैं जैसे कि सुबह 4:30 बजे उठना, एक घंटा तैराकी, एक घंटा मार्शल आर्ट्स, एक घंटा योग साधना व स्ट्रेचिंग अभ्यास करना। वह रात्रि 7 बजे भोजन ग्रहण करते हैं।
13.फिल्म “खिलाड़ियों के खिलाड़ी” में शूटिंग के दौरान 350 पाउंड वजन उठाते हुए उनकी गर्दन में चोट लग गई थी, जिसमें ब्रेन ली नामक व्यक्ति ने डब्लूडब्लूई पहलवान अंडरटेकर की भूमिका निभाई थी।
14.उन्होंने एक पंजाबी भजन “निर्गुण राख लिया, संतन का सत्कार किया” को अपनी आवाज़ दी है। उन्होंने इस भजन से एकत्रित धन राशि को 7/11 मुंबई बम धमाकों के पीड़ितों को दान कर दिया।
15.वर्ष 2007 उनका स्वर्णिम वर्ष था, क्योंकि उन्होंने उस वर्ष चार सुपर हिट फिल्में कीं :- नमस्ते लंदन, वेलकम, भूल – भुलैया और हे बेबी।
16.वर्ष 2008 में, विंडसर विश्वविद्यालय ने उन्हें अपने उत्कृष्ट अभिनय करियर के लिए मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया।
17.उन्हें भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार और राजीव गांधी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
18.फिल्म अभिनेता अजय देवगन और जॉन अब्राहम, अक्षय कुमार के बहुत अच्छे दोस्त हैं।
19.अक्षय कुमार का जन्मदिन (9 सितम्बर) उनकी पूर्व प्रेमिका शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा के जन्मदिन से मेल करता है।
20.वर्ष 2008 में, एक अंग्रेजी पत्रिका (People magazine) ने अक्षय कुमार को "Sexiest Man Alive" के टाइटल से नवाजा।
21.उन्होंने अपनी पीठ पर अपने बेटे आरव के नाम का टैटू बनवाया हुआ है। 

Wednesday, 18 July 2018

Dharmendra Biography in Hindi - धर्मेंद्र जीवन परिचय

Dharmendra Biography in Hindi - धर्मेंद्र जीवन परिचय


Dharmendra Life 

वास्तविक नाम :- धर्मेंद्र सिंह देओल
उपनाम  :- "धर्म," "गर्म धर्म," "बॉलीवुड के ही - मैन"
व्यवसाय  :- फिल्म अभिनेता, निर्माता और राजनीतिज्ञ
पार्टी/दल  :- भारतीय जनता पार्टी

राजनीतिक यात्रा  :- 2003: भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए।
2004: में, भारतीय जनता पार्टी से राजस्थान के बीकानेर क्षेत्र से सांसद चुने गए।

Dharmendra Physical structure

लम्बाई  :- लगभग 173 से० मी० ,1.73 मी०  5फीट’ 8इन्च- ”
वजन/भार :-  लगभग 70 कि० ग्रा०
आँखों का रंग :- काला
बालों का रंग :- काला

Dharmendra personal life

जन्मतिथि  :- 8 दिसंबर 1935
आयु  :- 2018 के अनुसार 83 वर्ष
जन्मस्थान  :- गांव: नस्राली, तहसील: खन्ना, जिला: लुधियाना, राज्य: पंजाब, भारत
राशि :- धनु
राष्ट्रीयता  :-  भारतीय
गृहनगर   :- साहनेवाल, पंजाब, भारत
स्कूल/विद्यालय    :- सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ललटन कलां, लुधियाना, पंजाब इंटरमीडिएट रामगढ़िया कॉलेज फगवाड़ा, पंजाब महाविद्यालय/विश्वविद्यालय लागू नहीं शैक्षिक योग्यता 12 वीं पास (इंटरमीडिएट आर.जी. (रामगढ़िया) कॉलेज फगवाड़ा, पंजाब से)

Dharmendra Debut film actor 

दिल भी तेरा हम भी तेरे (1960)
फिल्म निर्माता :- बेताब (1983)

पंजाबी फिल्म अभिनेता :- कंकन दे ओले (1970) Kankan De Ole

टेलीविज़न :- 2011 में कलर्स चैनल पर प्रसारित कार्यक्रम India's Got Talent में एक जज की भूमिका के तौर पर
राजनीति :- 2004 में, जब वह राजस्थान में बीकानेर विधानसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए थे।

Dharmendra family

पिता :- केवल किशन सिंह देओल (सरकारी स्कूल शिक्षक)
माता :- सतवंत कौर
भाई :- अजीत देओल
बहन :- लागू नहीं

धर्म :- सिख धर्म (हेमा मालिनी से शादी करने के लिए इस्लाम में परिवर्तन किया)

पता :- प्लॉट नं 22, 11 वें रोड, जुहू, मुंबई, भारत

शौक/अभिरुचि :- साइकिल चलाना, यात्रा करना, फिल्में देखना

Dharmendra  Prize

1991 :- सर्वश्रेष्ठ फिल्म घायल निर्माता के रूप में फिल्मफेयर अवॉर्ड और उत्तम मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

1997 :- भारतीय सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2007 :-IIFA लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
1991 :- प्रथम महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के द्वारा पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
धर्मेंद्र पद्म भूषण पुरस्कार लेते हुए

Dharmendra Conflict

• 1980 में, जब उन्हें हेमा मालिनी से विवाह करना था, तब उस समय उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर ने उन्हें तलाक नहीं दिया था। जिसके चलते धर्मेन्द्र ने इस्लाम धर्म अपनाया। जिसकी मीडिया में काफी आलोचना हुई।
• वर्ष 2004 में अपने चुनाव प्रचार के दौरान उनके द्वारा एक विवादास्पद बयान दिया, जिसकी काफी आलोचना हुई। अपने बयान में उन्होंने कहा था कि "उन्हें भारत का प्रशासक बना देना चाहिए, ताकि वह यहाँ के नागरिकों को शिष्टाचार/नैतिकता के उन नियमों को सीखा सकें, जो लोकतंत्र के लिए आवश्यक हैं।"
• संसद में संसदीय सदस्य के रूप में गैरहाजिर होने पर मीडिया में उनकी काफी आलोचना की गई।

Dharmendra  Favorite things

पसंदीदा निर्देशक :-  अर्जुन हिंगोरानी
पसंदीदा अभिनेता :- गुरु दत्त और दिलीप कुमार
पसंदीदा अभिनेत्री  :- सुरैया और नूतन
पसंदीदा गायक :- लता मंगेशकर और किशोर कुमार

Dharmendra Love affairs and other information

वैवाहिक स्थिति  :- विवाहित
गर्लफ्रेंडस/अन्य मामले :- मीना कुमारी अभिनेत्री (1960) , हेमा मालिनी (1970 - वर्तमान) पत्नी प्रकाश कौर (1954-1982)

विवाह तिथि :- वर्ष 1954 (प्रथम पत्नी, प्रकाश कौर)
2 मई 1 9 80 (दूसरी पत्नी, हेमा मालिनी)

Dharmendra children

बेटा :- सन्नी देओल (अजय सिंह देओल), बॉबी देओल (विजय सिंह देओल) अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर से
 धर्मेंद्र, सन्नी देओल (अजय सिंह देओल), बॉबी देओल (विजय सिंह देओल) के साथ
बेटी :- विजेता देओल और अजीता देओल (अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर से)
 धर्मेंद्र,विजेता देओल और अजीता देओल और बॉबी देओल के साथ
ईशा देओल और अहाना देओल (अपनी दूसरी पत्नी हेमा मालिनी से)
ईशा देओल और अहाना देओल

धर्मेंद्र से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ - Interesting Facts About Dharmendra

1.क्या धर्मेंद्र धूम्रपान करते थे ? उन्होंने 1983 में धूम्रपान छोड़ दिया।

2.क्या धर्मेंद्र शराब पीते हैं ? हाँ धर्मेंद्र शराब पीते है |

3.उनका जन्म ब्रिटिश शासन काल के दौरान पंजाब में लुधियाना जिले के एक छोटे से गांव में हुआ, जहां उनके पिता एक सरकारी स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्यन्वित थे।

4.धर्मेंद्र बचपन से ही स्कूल जाने के अनिच्छुक थे, और प्रायः अपनी मां से आग्रह करते थे कि वह उन्हें स्कूल न भेजें।

5.अध्ययन में रुचि की कमी के कारण, धर्मेंद्र केवल 12 वीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर सके।

6.अभिनय के शुरुआती दिनों में धर्मेंद्र का फिल्मों के प्रति काफी लगाव हो गया था, जिसे वह अपनी माँ के साथ अभिनय के रूप में साझा करते थे।

7.एक दिन, अपनी मां के सुझाव पर, उन्होंने अपने पोर्टफोलियो को "Filmfare New Talent Hunt" में भेजा।
वास्तव में, यह पोर्टफोलियो बिमल रॉय और गुरु दत्त के एक फिल्म विज्ञापन के लिए था और जिसके लिए धर्मेंद्र ने मलेरकोटला में जान मोहम्मद (जॉन एंड संस) द्वारा अपना पोर्टफोलियो बनवाया था।

8.धर्मेंद्र ने फिल्मफेयर मैगजीन "New Talent Hunt" पुरस्कार जीता और काम की तलाश में पहली बार मुंबई आए।

9.वर्ष 1954 में, महज 19 वर्ष की आयु में धर्मेंद्र का विवाह उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर से हुआ।

10.अपनी पहली एक्शन फिल्म (फूल और पत्थर -1966) में एक मात्र नायक के रूप में दिखाई दिए, जो वर्ष 1966 में सबसे ज्यादा कमाई वाली फिल्म बनीं। जिसके लिए धर्मेंद्र का नाम सर्वश्रेष्ठ फिल्मफेयर अभिनेता के रूप में नामांकित किया गया था।

11.1960 के दशक में, मीना कुमारी के साथ उनका संबंध अक्सर सुर्ख़ियों में बना रहा। क्योंकि सूत्रों के मुताबिक मीना कुमारी ने धर्मेंद्र की बॉलीवुड में ए- लिस्टर्स में शामिल होने के लिए मदद की थी।

12.1975 में, धर्मेंद्र को बॉलीवुड में बेहतरीन रोमेंटिक, हास्य और एक्शन किरदार निभाने के लिए एक बहुमुखी नायक के रूप में जाना जाता है।

13.बॉलीवुड में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की जोड़ी सबसे लोकप्रिय मानी जाती है, वर्तमान में हेमा मालिनी, धर्मेंद्र की पत्नी हैं।

14.धर्मेंद्र ने अपने दोनों बेटों को फिल्मजगत में एक नई शुरुआत के लिए कई फ़िल्में बनाईं, जिनमें फिल्म बेताब में सनी देओल और बरसात (1995) में बॉबी देओल को अवसर प्रदान किया। उन्होंने अपने भतीजे अभय देओल को भी फिल्म सोचा ना था (2005) से लॉन्च किया।

15.धर्मेन्द्र (गायक और अभिनेता) सुरैया के एक महान प्रशंसक हैं, एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कहा कि, अपने गृहनगर साहनेवाल में स्थित सिनेमाघर में कई मीलों दूर चलकर 40 से भी अधिक बार उनकी फिल्म दिलगी (1949) को देखा। 2004 में उनकी मृत्यु के समय वह उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए। फिल्म दिलगी (1949) |

16.ऐसा कहा जाता है कि फिल्म शोले (1975) की शूटिंग के दौरान, धर्मेंद्र को हेमा मालिनी से प्यार हो गया था, और जब भी हेमा मालिनी के साथ कोई अंतरंग दृश्य शूट किया जाता, तो वह लाइट्स का कार्य करने वाले लड़कों को थोड़ी रिश्वत देकर लाइट्स में कोई गड़बड़ करवाते ताकि वह हेमा मालिनी के साथ वही दृश्य (रिटेक्स) बार- बार करते रहें। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी |

17.फिल्म शोले की शूटिंग के दौरान, धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी बहुत लोकप्रिय हुई, जिसके चलते दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। फिल्मजगत में दोनों ने कई फिल्मों में एक साथ कार्य किया। बॉलीवुड में दोनों की दोस्ती एक मिसाल कायम करती है। अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र |

18.1975 में आई फिल्म ” प्रतिज्ञा” के एक गाने “मैं जट्ट यमला पगला दिवाना” के फिल्मांकन के दौरान जब कोरियोग्राफर उन्हें नृत्य के स्टेप्स समझाते – समझाते थक गया, तो धर्मेंद्र ने अपने वास्तविक स्टाइल में नृत्य करने का निर्णय लिया।

19.एक कार्यक्रम के दौरान, अनुभवी अभिनेता दिलीप कुमार ने धर्मेंद्र से कहा तुम सबसे खूबसूरत आदमी हो, जिसे पहले कभी नहीं देखा, और कहा, “भगवान ने बड़ी फुर्सत से बनाया होगा इसे।”  धर्मेंद्र दिलीप कुमार के साथ  अपने एक कार्यक्रम के द्वारा दिग्गज गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने धर्मेंद्र की जीवनी को परिभाषित किया।

Tiger Shroff Biography Hindi - टाइगर श्रॉफ की जीवनी

Tiger Shroff Biography Hindi- टाइगर श्रॉफ की जीवनी


Tiger Shroff Life 

Tiger Shroff  का जन्म 2 मार्च 1990 को हुआ था। वह एक भारतीय फिल्म अभिनेता हैं और मुंबई में पैदा हुए, जो हिंदी फिल्मों में काम करते है। वह अभिनेता "Jackie Shroff" और निर्माता "Ayesha Dutt" के बेटे है। उन्होंने 2014 की एक्शन कॉमेडी में अग्रणी भूमिका ‘Heropanti’ की, जिसके लिए उसे Best Male Debut nomination के लिए "Filmfare Award" प्राप्त हुआ। उन्होंने आगे फिल्म Baaghi (2016) में अभिनय किया, जिसने 1 अरब डॉलर से अधिक की दुनिया भर में कमाई की, और सुपर हीरो थ्रिलर A Flying Jatt (2016) के लिए प्रशंसा प्राप्त की।

Tiger Shroff  का जन्म 2 मार्च 1990 को हुआ था और जब उन्होंने फिल्मों में शुरुआत की तो आधिकारिक तौर पर अपना नाम बदल कर Tiger रख लिया। Tiger Shroff  का जन्म भारतीय फिल्म अभिनेता "जैकी श्रॉफ" (Jackie Shroff )और "आयशा श्रॉफ "(Ayesha Shroff) के घर हुआ था। वह दो भाइयों में बड़े हैं, उनकी बहन  "कृष्णा श्रॉफ "(Krishna Shroff )उनकी तुलना में तीन साल छोटी है।



अपने पैतृक पक्ष से, वह गुजराती और "Uyghur" (उईघुर) वंश के हैं और उनकी मातृभूमि से वह बंगाली और "Belgian" (बेल्जियाई) मूल के हैं। Tiger Shroff एक भक्त है, जो "Shaiva Hindu" (शिव) की पूजा करते हैं।


Tiger Shroff Education

उन्होंने "American School of Bombay" में अपनी स्कूली शिक्षा की। उन्हे "Taekwondo" में पांचवीं डिग्री का Black Belt भी मिला। एक युवा उम्र के बाद से, श्रॉफ का प्रमुख शौक dance रहा है, और नृत्य रूपों में breakdancing, popping, और "locking" को "follow" करते है। "Michael Jackson" और "Chris Brown" उनके "inspiration" रहे है।

Tiger Shroff Career

Tiger Shroff ने 2009 में टीवी शो, Fauji, रीमेक में भूमिका निभाने से इंकार कर दिया। इसके बाद 2010 में, Subash Ghai ने 1983 की फिल्म “Hero” उनके पिता की रीमेक में Tiger Shroff को रिलीज किया। किसी वजह के कारण Tiger Shroff ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। Tiger Shroff आखिरकार "Heropanti" फिल्म में नज़र आए। उनकी पहली फिल्म, "Heropanti" थी, जो "box office" पर सफल रही। इस फिल्म में उनके नृत्य के कौशल और स्टंट की प्रशंसा भी हुई।

श्रॉफ ने बाद में "सब्बीर खान" (Sabbir Khan) की action drama film ‘Baaghi’ (2016) में "Nadiadwala Grandson Entertainment" के "production" के तहत "श्रद्धा कपूर" (Shraddha Kapoor) के साथ दिखाई दिए, जो दुनिया भर में box-office पर सफल रही।

Tiger ‘Flying Jatt’ फिल्म का एक हिस्सा भी है। यह Remo D’Souza और Ekta Kapoor द्वारा निर्देशित है। इस फिल्म में Tiger Shroff ने Jacqueline Fernandez के साथ काम किया और पंजाबी सुपरहीरो की भूमिका निभाई।

2017 में, Tiger Shroff ने film ‘Munna Michael’ में अभिनय किया, जिसे आलोचकों की अत्यधिक नकारात्मक समीक्षा मिली और box office में असफल रही। यह उनके अभिनय करियर में उनकी दूसरी फ्लॉप थी।

2018 में, उन्होंने Disha Patani के साथ, film ‘Baaghi 2’ की अगली कड़ी में अभिनय किया। वह अगली film ‘Student of the Year 2’ में होंगे।


Tiger Shroff Awards

उन्होंने "Stardust Award for Superstar of tomorrow-Male, BIG Star Entertainment Award for Most Entertaining Actor-Male, Star Guild Award for Best Male Debut, IIFA Award for Star Debut Of The Year-Male and Life Ok Screen Award for Most Promising Newcomer-Male" फिल्म ‘Heropanti’ के लिए जीता।

Jaishankar Prasad Biography In Hindi - जयशंकर प्रसाद की जीवनी

Jaishankar Prasad Biography In Hindi - जयशंकर प्रसाद की जीवनी


नाम :- जयशंकर प्रसाद
जन्म :- 30 जनवरी 1889 (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
पिता का नाम :- श्री देवी प्रसाद साहु
काल :- छायावादी युग
भाषा :- हिन्दी
शैली :- भावात्मक, वर्णात्मक
मृत्यु :- 15 नवम्बर 1937
मृत्यु स्थान :- (काशी)

Jaishankar Prasad छायावादी युग के महान लेखक थे | बाबू Jaishankar Prasad हिन्दी के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं | ये एक युग प्रवर्तक लेखक थे | जिन्होंने एक साथ कविता, नाटक, कहानी और उपन्यास के क्षेत्र में हिन्दी को गौरन्वित किया | कवि के रुप में वह सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानन्दन पन्त, महादेवी वर्मा के साथ छायावाद के चौथे स्तम्भ के रूप में प्रतिष्ठित हुए | इन्होंने अपनी रचनाओं में नाटक सबसे ज्यादा लिखे हैं | युग प्रवर्तक नाटककार थे | इन्हें “कामायनी” पर मंगला प्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ | इन्होंने अपना 48 वर्षों के छोटे जीवन में ही हिन्दी की सभी विद्याओं पर रचनाएं लिखी |

Jaishankar Prasad शतरंज के खिलाड़ी भी थे | बग बगीचे और भोजन बनाने के शौकीन थे | वे गम्भीर प्रकृति के व्यक्ति थे | वे ‘नागरी प्रचारिणी’ सभा के उपाध्यक्ष भी थे | क्षय रोग से 15 नवम्बर 1937 को मात्र 47 वर्ष की उम्र में इनकी मृत्यु काशी में हो गयी |

Jaishankar Prasad Compositions


काव्य- कानन कुसुम, महाराणा का महत्व, झरना, लहर, आंसू, कामायनी प्रेम पथिक |

उपन्यास- कंकाल, तितली, इरावती (अपूर्ण उपन्यास) |

Jaishankar Prasad Story 


छाया, प्रतिध्वनि, आंधी, इंद्रजाल, आकाश-दीप, पुरस्कार, ममता |

एकांकी- प्रायश्चित, परिणय |

Jaishankar Prasad Drama


स्कन्दगुप्त, चन्द्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, जनमेजय का नाग यज्ञ, राज्यश्री, कामना एक घूंट, करुणालय, विशाख, अजातशत्रु |

Jaishankar Prasad Eassy


सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य, प्राचीन आर्यावर्त और उसका प्रथम सम्राट, काव्य कला |

Jaishankar Prasad Literary services


Jaishankar Prasad बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे | वे महान कवि, सफल नाटककार, श्रेष्ठ उपन्यासकार, कुशल कहानीकार, एंव गम्भीर निबन्धकार थे | इन्होने हिन्दी के श्रेष्ठ ग्रंथों की रचना कर हिन्दी साहित्य को समृद्ध बना दिया |

Jaishankar Prasad Biography


Jaishankar Prasad का जन्म 30 जनवरी 1889 ई० में हुआ था | इनका जन्म काशी के एक प्रतिष्ठित सुंधनी साहू नाम के प्रसिद्ध वैश्य परिवार में हुआ था | इनके पितामह ‘शिवरतन साहू’ दान देने में प्रसिद्ध थे व इनके पिता ‘बापू देवी प्रसाद’ कलाकारों का आदर करने के लिए विख्यात थे | इनके बाल्यकाल में ही इनके पिता जी का देहांत हो गया | किशोरावस्था से पूर्व इनकी माता और बड़े भाई का देहांत हो गया | जिसके कारण 17 वर्ष की उम्र में ही जयशंकर प्रसाद पर अनेक जिम्मेदारियां आ गयी |

घर में सहारे के रूप में केवल विधवा भाभी और परिवार से सम्बद्ध अन्य लोगों ने इनकी सम्पत्ति हड़पने का षड्यंत्र रचा, परिणाम स्वरुप इन्होंने विद्यालय की शिक्षा छोड़ दी और घर में ही अंग्रेजी, हिन्दी, बंगला, उर्दू, फारसी, संस्कृत आदि भाषाओं का गहन अध्यन किया | ये साहित्यिक प्रवृति के व्यक्ति थे, शिव के उपासक थे और मांस मदिरा से दूर रहते थे | इन्होंने अपने साहित्य साधना से हिन्दी को अनेक उच्चकोटि के ग्रन्थ-रत्न प्रदान किए | इनके गुरुओं में रसमय सिद्ध की भी चर्चा की जाती है | इन्होंने वेद, इतिहास, पुराण व साहित्य का गहन अध्ययन किया था |